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जैन मंदिरों में चल रही संस्कार की पाठशाला रोज एक घंटे सीखने आते हैं समाज के 25 बच्चे

3 वर्ष पहले
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पूजन विधि और परिवार से संवाद करना सीख लिया

भास्कर संवाददाता | इटारसी

जैन समाज के 25 परिवारों के बच्चे रोज एक घंटे संस्कार सीखने दो मंदिरों में चल रही पाठशाला आ रहे हैं। स्कूल की परीक्षा के बाद गर्मी की छुटि्टयाें में भी पहली लाइन के पार्श्वनाथ मंदिर और न्यास कॉलोनी के आदिनाथ मंदिर में दो पाठशालाएं चल रही हैं। जो बच्चे बाहर नहीं गए वे नियमित पाठशाला आ रहे हैं। बच्चों को धर्म के प्रति रुझान और पारिवारिक संस्कार सिखाने यह प्रयोग चल रहा है। वहीं महावीर भवन में जैन आर्यिकाएं प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे आचार्य विद्यासागर रचित मूक माटी पर प्रवचन दे रही हैं।

तीन महीने पहले अार्यिका संघ के नगर आगमन पर सात दिन के बाल विद्या संस्कार एवं प्रशिक्षण शिविर से यह पहल हुई। इसमें 50 परिवारों के 4 से 15 साल तक की उम्र के बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण किया गया। मंदिरों में जैन पाठशाला में शाम को एक घंटे बच्चे आते हैं। पार्श्वनाथ मंदिर में सपना जैन, वर्षा बजाज, ज्योति जैन व विधि जैन तथा आदिनाथ मंदिर में प्रियल, लगन व कुमकुम बच्चों को निशुल्क पढ़ाती हैं। इनका कहना है कि जुलाई से पाठशाला में आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ जाएगी।

ऐसे आया नई पीढ़ी में बदलाव

शिविर में आने वाले बच्चे मंदिर में विधि-विधान से सामूहिक पूजन करने लगे हैं। और गुरुभक्ति में पारंगत हो गए हैं।

आगे क्या

समाज की एक चिंता बच्चों का मोबाइल फोन और वीडियो गेम्स में बिजी रहना है। उन्हें परिवार के साथ संवाद और समाज में सक्रिय भागीदारी से जोड़ा जाएगा।

बच्चों में छुपी सृजनात्मक क्षमता को बढ़ावा दिया जाएगा। आध्यात्मिक खेल गतिविधियां भी होंगी। बच्चों को इसके लिए प्रेरित समाज की ही टीन एजर्स छात्राएं व बहुएं कर रही हैं।

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