इटारसी जंक्शन पर निजी कंपनी को सफाई का ठेका मिला फिर भी सफाई नहीं दिखती है। जगह-जगह गंदगी है। रेलवे स्टेशन की सफाई के लिए रोजाना 50 हजार रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह ठेका भी अगले महीने खत्म हाेने वाला है। स्वच्छता भारत अभियान का इटारसी स्टेशन पर कोई असर नहीं दिखता। कंपनी के कर्मचारी यह कारण बता रहे कि यहां की पब्लिक ही सफाई के बाद कचरा डाल देती है।
हर माह 15 लाख खर्च
जंक्शन की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में हैं। सफाई काम करने वाली कंपनी को रेलवे 15 लाख रुपए महीना देती है। सातों प्लेटफार्म व एप्रान पर सफाई के लिए तीन शिफ्ट में 175 कर्मचारी काम पर रखे हैं। पहली शिफ्ट सुबह 8 से 2 में 85, दूसरी शिफ्ट 2 से रात 10 तक में 60 और तीसरी शिफ्ट रात 10 से सुबह 6 बजे तक 30 कर्मचारियों को रखा गया है।
गिनती कराने पर भी नहीं मिले पूरे कर्मचारी
स्टेशन पर सफाई कर्मियों की संख्या पता करने भोपाल मंडल से आए रेलवे के अधिकारियों ने कई बार गिनती भी कराई। लेकिन शिफ्ट अनुसार निर्धारित संख्या से कम संख्या में ही कर्मचारी मिले हैं। जितने कर्मचारी सफाई काम के लिए कागजों में दर्ज हैं उतने यहां काम नहीं करते।
इटारसी स्टेशन पर सफाई का ठेका चलाने वाली कंपनी एपकॉन इंडिया प्राइवेट लिमिडेट का देश में 20 जगह ठेका है। इसके एक स्थानीय कर्मचारी सुंदरम का यह कहना है कि पुणे व पुरी में तो सफाई के लिए हमें अवार्ड मिले। लेकिन इटारसी स्टेशन पब्लिक में जागरूकता नहीं है। वह सफाई में सहयोग नहीं करना चाहती। हमारा ठेका अगले महीने खत्म हो रहा। अभी शादियों का सीजन चलने से तीन-चार दिन से कर्मचारियों की कमी है। किसी की भी फालतू की उपस्थिति दर्ज नहीं होती है।