जनपद मुख्यालय के समीपी ग्राम पंचायत करनपुरा का आदिवासी बाहुल्य गांव करौंदी के लोग बिजली, पानी व सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। इस गांव के विकास की ओर शासन-प्रशासन द्वारा अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। हालही में गांव में भीषण जलसंकट की स्थिति है।
इसके अलावा दूसरी ओर मवेशियों के लिए भी गांव में बंूद भर पानी नहीं है, जिससे मवेशी पानी के लिए यहां-वहां भटकते रहते हैं। गांव में एक हेंडपंप था जो एक महीना पहले ही खराब हो गया है। दो साल पूर्व करौंदी गांव के लोगों के लिए भीषण जल संकट से निजात दिलवाने के लिए बोर किया गया थाद्।
इस मोटर के डलने के बाद जिसमें पीने के पानी का इंतजाम किया गया था लेकिन ग्राम पंचायत के द्वारा बोर में रखी मोटर को उठवा ली गई। दूसरी ओर गांव में पेयजल का अन्य कोई स्रोत नहीं हैं। जिसके चलते लोग गांव के बाहर एक कुंए में पानी भरने जाते हैं।
कल ही भेजेंंगे टीम
पीएचई के ईई केएस पवार का कहना है कि कल ही टीम भेजकर करोँदी गांव का हैंडपंप सुधरवाते हैं। ग्रामीणों की पेयजल समस्या का समाधान किया जाएगा बाकी जलस्रोतों को देखेंगे।
इस कुएं में रात भर में आता है महज एक फीट पानी
गांव वालों ने कहा-शिकायतें कर थक गए कोई नहीं सुनता, एसडीएम बोले-कल जाएगी टीम
कुएं में रात भर में आता है एक फीट पानी
इस कुएं में भी तलहटी में पानी पहुंच गया है। जिसमें रात भर में झिर के कारण एक फीट तक पानी आ जाता है इसके बाद लोग पानी भर लेते हैं तो कुएं खाली हो जाता है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि बसंत राय ने बताया कि गांव के लोग तो जैसे-तैसे पानी का इंतजाम कर लेते हैं लेकिन मवेशियों के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं, जिससे मवेशी प्यास से बेहाल यहां-वहां भटककर नालियों का पानी पीते रहते हैं। उन्होंने बताया कि करौंदी गांव में मूलभूत सुविधाओं के लिए आज तक शासन-प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया है। वहीं कैलास आदिवासी, फागू आदिवासी, सुरेंद्र, रामदयाल, संतोषरानी, प्रेमरानी, प्रीति, बबीता ने बताया कि हम लोग वैसे ही बिजली, पानी, सड़क जैसी सुविधा से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अब सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। हम लोगाें को पानी के लिए काफी मशक्कत करना पड़ रही है।