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कोर्ट के आदेश पर एंट्री फीस के नाम पर हो रही वसूली बंद हुई तो घाट ठेकेदार ने छेड़ा आंदोलन

3 वर्ष पहले
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यमुना नदी के प्रति आस्था, मशीनों से हो रहे खनन से गांव को बाढ़ के समय खतरे का डर दिखाकर महिलाओं को आगे कर चल रहे आंदोलन के पीछे भी रेत के वाहनों से अवैध वसूली का मामला सामने आ रहा है। वैसे शुक्रवार दे शाम को भी गुमथलाराव की महिलाओं द्वारा अवैध माइनिंग, ओवरलोड व मशीनों के माध्यम से हो रही खुदाई के विरोध में यमुना घाट तक कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। खेत व गांव को बचाने के लिए मशीनों से अवैध रूप से हो रहे खनन पर रोक लगाने की मांग बुलंद की। हालांकि मामले की तह में जाने पर जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे लग रहा है कि कहीं न कहीं इन महिलाओं को कोई अपने हित के लिए प्रयोग कर रहा है।

कैंडल मार्च में शामिल महिलाएं कमला, अंजू, बबली, कलावती, सुषमा, गीता, सुमन, रमेशो, कमलेश व सरोज आदि का कहना है कि यमुनानदी में अर्थमूविंग व पोपलाइनों के माध्यम से नियमों को ताक पर रखकर रेत की खुदाई की जा रही है। जिससे यमुनानदी के तटबंध क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। वहीं रेत घाट पर काम करने वाली कंपनी के एक मैनेजर ने बताया कि गलत माइनिंग के नाम पर महिलाओं को बहकाया जा रहा है। इसके पीछे कुछ लोगों का अपना हित छिपा है।

जब कोर्ट के आदेश के बाद एंट्री फीस देना बंद किया तो शुरू हुआ आंदोलन : नाम न छापने की शर्त पर माइनिंग ठेकेदारों ने बताया कि हर वर्ष प्रशासन की ओर से यमुनानदी क्रॉस कर आने-जाने के लिए ठेका होता है। इस वर्ष भी प्रशासन द्वारा ठेका दिया गया है। अबकी बार यमुनानदी के घाट को पार कराने का यह ठेका बीजेपी के एक नेता के पास है। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा कुछ समय पहले रेत घाट पर आने वाले वाहनों से भी 200 से 500 रुपए एंट्री फीस के नाम पर लिए जाने लगे। इसके बाद रेत घाट पर वाहनों से एंट्री फीस लिए जाने का मामला एक रेत ठेकेदार द्वारा जगाधरी सिविल कोर्ट में दायर किया गया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए इस पर स्टे दे दिया। लेकिन कोर्ट का यह फैसला शायद उक्त ठेकेदार को रास नहीं आ रहा है। रेत खनन के ठेकेदारों पर दबाव बनाने व अपने पुराने वसूले के काम को चलाने के लिए ठेकेदार द्वारा महिलाओं को हथियार बनाया जा रहा है। महिलाओं को यमुना नदी के प्रति आस्था दिखाकर माइनिंग के नाम पर बहकाया जा रहा है।

जठलाना | रात के समय रेत के घाट पर मोमबत्तियां लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं।

सिविल कोर्ट ने स्टे दिया तो सेशन कोर्ट गए

अबकी बार यमुनानदी घाट पार कराने को लेकर ठेका 33 लाख में लिया है। इसमें संधाला के पूर्वी छोर से लेकर गुमथला तक करीब 4 किलो मीटर का एरिया है। अगर इस 4 किलोमीटर के एरिया में कोई भी वाहन आता जाता है, तो हम एंट्री के नाम पर उस वाहन चालक से पैसे लेने के हकदार है। रेत के एक ठेकेदार द्वारा रेत लेने वाले वाहनों से एंट्री फीस को अवैध बताते हुए सिविल कोर्ट में केस दायर किया है। कोर्ट ने मामले को स्टे कर दिया गया है। जिसके बाद हमने मामले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी है। केस में अब 22 मई को सुनवाई होनी है। महिलाओं माइनिंग के खिलाफ प्रदर्शन इस लिए कर रही है क्योंकि रेत ठेकेदारों द्वारा अवैध तरीके से अर्थमूविंग व पोपलाइन मशीनों की मदद से काफी गहराई तक खुदाई की जा रही है। यमुनानदी के तटबंध क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जिससे यमुनानदी के निकट स्थित गांवों में बाढ़ आने की आशंका है। ऋषिपाल दोहली, बीजेपी नेता

ठेके के बारे में बिना रिकार्ड देखे कुछ नहीं कहा जा सकता। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट का जो फैसला होगा वो हमें मान्य होगा। दीनानाथ शर्मा, बीडीपीओ

एनजीटी के आदेशों की पालना करते हुए पुलिस दिन रात रेत के घाटों पर गश्त करती है। रात को भी घाटों पर पुलिस नजर रख रही है। यमुना नदी में अब मशीनों की खुदाई पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। रेत ठेकेदारों को सख्ती में कह दिया गया है कि वह मशीन के माध्यम से रेत की खुदाई न करें। अगर कोई ठेकेदार मशीन के माध्यम से रेत की खुदाई करता पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दीदार सिंह, थाना जठलाना प्रभारी

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