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टाटा प्रभावितों का जमीन वापसी के मुद्दे पर सीएम से मिलने से इनकार, सरपंचों की बैठक में लिया निर्णय

3 वर्ष पहले
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जगदलपुर | लोहंडीगुड़ा के टाटा का प्लांट लगने से प्रभावित चार गांवों के सरपंच व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हजारों ग्रामीणों के साथ दाबपाल में बैठक कर टाटा प्रभावित ग्रामीणों की जमीन वापसी की लड़ाई को जारी रखने की बात कही। बैठक में सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में जमीन वापसी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मिलने से इनकार करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों से जमीन वापसी के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ते आ रहे हैं जिसकी जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह व उनके अन्य मंत्रियों को भी है। आज चुनाव पहुंचने पर जमीन वापसी की बात कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि क्या भाजपा के कार्यकर्ता होने पर ही जमीन वापस होगी।

टाटा स्टील प्लांट प्रभावित ग्रामीणों ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जमीन वापसी के साथ ही 10 वर्षों से कई किसान इस जमीन पर खेती ही नहीं कर पाए तथा शासकीय व अन्य योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ा। इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने पर छात्र-छात्राओं को स्कूल-कॉलेज छोड़ना पड़ा। ऐसी कई समस्याओं का सामना करते हुए नुकसान उठाना पड़ा, उसका सरकार क्षतिपूर्ति करते हुए हर्जाना भी दे। भाजपा के किसी भी लालच या चाल में हम नहीं आने वाले हैं। ये सरकार पूंजीपतियों की आदिवासी विरोधी सरकार है जो आदिवासियों की जमीन हड़पकर उद्योगपतियों को बेचती है, इससे हमें किसी प्रकार की उम्मीद नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से भाजपा के स्थानीय नेता द्वारा टाटा प्रभावितों को जमीन वापसी का लालच देकर मुख्यमंत्री से मिलाने का प्रयास किया जा रहा था। बैठक में इस दौरान टाकरागुड़ा सरपंच हिड़मो राम, धुरागांव सरपंच पतिलाल कश्यप, छोटा पड़ोदा सरपंच गंगाराम , छिंदगांव सरपंच उमेश कश्यप, महेश कश्यप, मदन टेंगड़, बासीराम, हेड़मा मंडावी और 10 गांव के ग्रामीण मौजूद थे।

जमीन वापसी के साथ ग्रामीणों ने नुकसान का मांगा मुआवजा

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