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इस साल 1 लाख 13 हजार हेक्टेयर में होगी धान की बोआई, रकबा घटाया

3 वर्ष पहले
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प्रशासन व कृषि विभाग अब फसल चक्र में परिवर्तन की पहल कर रहा है। दलहन व तिलहन की फसल को बढ़ावा देने के लिए इस साल पिछले साल की तुलना में करीब 1,627 हेक्टेयर कम रकबे में धान की फसल ली जाएगी।

वहीं 1 लाख 13 हजार में धान एवं 18,500 हेक्टेयर में दलहनी फसलों की खेती की जाएगी। विशेषकर दरभा, लोहांडीगुड़ा, बास्तानार और तोकापाल क्षेत्र के किसानों को भी फसल चक्र में परिवर्तन करने और उन्हें दलहन और तिलहन की फसल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

जिले में टमाटर और सब्जियों की खेती में किसानों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। कुछ दिनों पहले टमाटर उत्पादकों को अपनी फसल की लागत का भी मूल्य नहीं मिला तो टमाटर को संजय बाजार में फेंककर विरोध करना पड़ा था। ऐसे हालात धान उत्पादक किसानों के साथ उत्पन्न न हों, इसलिए शासन ने इस साल जिले में धान की पैदावार के लक्ष्य में कटौती करते हुए बीते साल की तुलना में 1627 हेक्टेयर कम कर दिया है। इस साल 1 लाख 13 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की जाएगी।

वर्ष 2016-17 में जिले में 1 लाख 14 हजार 327 हेक्टेयर में धान की खेती की गई थी। कृषि विभाग के उपसंचालक कपिल देव दीपक ने बताया कि धान की तुलना में दलहन और तिलहन की खेती में अधिक फायदे को देखते हुए किसानों को इन दोनों फसलों की खेती करने की समझाइश दे रहे हैं। 200 से अधिक आरएईओ व ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों ने किसानों को जागरूक करना शुरू कर दिया है।

6800 हेक्टेयर में होगी सब्जियों की खेती

बीते साल अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी जैसी दलहनी फसलों की खेती 17 हजार 979 हेक्टेयर में की गई थी। इसे इस साल बढ़ाकर 18,500 कर दिया गया है। इसी तरह मूंगफली, तिल, रामतिल आदि तिलहन फसलों की खेती पिछले साल 8 हजार 903 हेक्टेयर में की गई थी। इसे इस साल बढ़ाकर 9,300 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसके अलावा अन्य खरीफ फसलों की खेती भी 7 हजार हेक्टेयर में की जाएगी, जिसमें सब्जियों की खेती करीब 6800 हेक्टेयर में होगी।

बारिश होने से 400 हेक्टेयर में धान की बोनी हो चुकी

बीते कुछ दिनों से यहां बीच-बीच में बारिश हो रही है, जिससे खेतों की मिट्टी पर्याप्त गीली हो गई है। किसान हल लेकर खेतों में पहुंचने लगे हैं और वहां धान की खेती की तैयारी में जुट गए हैं। वे सहकारी समितियों से बीज और खाद भी ले रहे हैं। कृषि विभाग के मुताबिक करीब 400 हेक्टेयर में धान की बोनी हो चुकी है।

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