जगदलपुर| मेडिकल कॉलेज का सेटअप महारानी हॉस्पिटल से शिफ्ट करने की कवायदों के बीच महारानी हॉस्पिटल में ड्यूटी के लिए 4 डाॅक्टरों को पीएचसी और सीएचसी से निकालकर यहां अटैच कर दिया गया है। इसके अलावा चार सहायक चिकित्सा अधिकारी (आरएमए) को भी रात में ड्यूटी के लिए अटैच किया है। इसके साथ ही महारानी हॉस्पिटल में लोगों को इलाज तो मिलेगा लेकिन रात में मरीज पूरी तरह से आरएमए के भरोसे रहेंगे। महारानी हॉस्पिटल को बंद करने की खबरों के बीच आठ चिकित्सकों और सहायक चिकित्सकों को अटैच करने के आदेश के साथ ही अब यह तय हो गया है कि महारानी हॉस्पिटल के सौ बिस्तरों का पूरा सेटअप यहां चले या न चले लेकिन फिलहाल कुछ दिनों तक लोगों को यहां आपात स्थिति में इलाज मिलेगा।
बताया जा रहा है कि अचानक ही महारानी हॉस्पिटल के लिए डाॅक्टरों को अटैच नहीं किया गया है बल्कि इसके पीछे डीएमई का एक कड़ा पत्र बड़ी वजह है। दरअसल मेडिकल कॉलेज में शिफ्टिंग के काम में हो रही लेटलतीफी को डीएमई ने भी गंभीरता से लिया है। एक दिन पहले डीएमई ने हॉस्पिटल अधीक्षक अविनाश मेश्राम को एक नोटिस भेजा है। इस नोटिस में उन्होंने शिफ्टिंग के काम में हो रही देरी को लेकर अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि 10 मई से शिफ्टिंग के लिए निर्देश दिए जा रहे थे। 12 मई को डिमरापाल के हॉस्पिटल बिल्डिंग की शुरुआत होनी थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। डीएमई ने नोटिस में लिखा है कि तत्काल महारानी हॉस्पिटल की चाबी सिविल सर्जन को सौंपी जाए और शिफ्टिंग का काम पूरा किया जाए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि यदि इस काम में वे लापरवाही बरतते हैं तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ इसका उल्लेख उनके सीआर में भी किया जाएगा।
महारानी हॉस्पिटल का रोस्टर अभी तैयार नहीं
इधर मेडिकल कॉलेज की शिफ्टिंग का काम तेजी से चल रहा है। 21 मई तक यहां इलाज की शुरुआत हो जाएगी। इसी दिन से महारानी हॉस्पिटल में आपातकाल ओपीडी भी चलेगा लेकिन अभी तक बाह्य रोग ओपीडी और वार्डों में ड्यूटी के लिए कोई रोस्टर तैयार नहीं हो पाया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि जिस दिन डिमरापाल में इलाज की शुरुआत हो जाएगी उसी दिन से महारानी हॉस्पिटल में इलाज शुरू हो जाएगा।