इंद्रावती नदी के पुराने पुल के पास से रेत का अवैध खनन रोकने शुक्रवार की शाम को माइनिंग इंस्पेक्टर देवेंद्र साहू शाम 4.30 बजे पहुंचे। भास्कर लगातार दो दिनों से इस संबंध में खबरें प्रकाशित कर रहा है , जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। करीब आधा घंटा तक इंतजार करने के बाद जब उन्हें नदी में एक भी महिला रेत खनन करती दिखाई नहीं दी तो वे वापस हो गए। इस दौरान उन्होंने नदी के दोनों आेर की जा रही खुदाई काे देखा और जल्द ही इस पर रोक लगाने की बात कही।
इधर नदी में निस्तारी के लिए पहुंची कई महिलाओं ने बताया कि नदी से रेत निकालने महिलाएं तीन शिफ्टों में काम करती हैं। शुक्रवार को भी महिलाओं ने सुबह से लेकर दोपहर तीन बजे तक रेत की निकासी की। बीच में वे डेढ़ घंटे के लिए अपने-अपने घरों में चली जाती हैं। इसके बाद शाम 4.30 बजे आकर फिर से शाम 6.30 बजे तक रेत की निकासी करती हैं। महिलाओं ने बताया कि इस काम में बड़ी संख्या में गरीब परिवार की महिलाएं जुट रही हैं। सवाल उठ रहे हैं कि माइनिंग इंस्पेक्टर शाम को उस समय ही क्यों पहुंचे जब रेत निकासी बंद थी।
माफिया इंद्रावती को चीर रहे, जिम्मेदार बेखबर
3 से 4.30 बजे तक आराम करती हैं महिलाएं, इसी दौरान पहुंचे इंस्पेक्टर
जगदलपुर। माइनिंग इंस्पेक्टर जब इंद्रावती नदी तट पर शाम 4.30 बजे पहुंचे तो एक भी महिला रेत खनन करती नहीं मिली। ये महिलाओं के आराम का समय था।
पहले भी हिदायत दे चुके हैं
माइनिंग इंस्पेक्टर ने कहा कि कुछ दिनों पहले भी शिकायत के आधार पर इस तरह से हो रही खुदाई और अवैध परिवहन को रोककर भविष्य में ऐसा नहीं करने की समझाइश महिलाओं को दी गई थी। माइनिंग इंस्पेक्टर ने कहा आने वाले दिनों में नदी से जो रेत निकालकर रखी गई है उसे बहा दिया जाएगा और बाहर निकाली गई रेत की जब्ती की जाएगी। काफी देर इंतजार करने के बाद जब रेत निकासी करने वाली महिलाएं नहीं आईं तो वे लौट गए। इंस्पेक्टर ने कहा कि इस मामले में पार्षद से बात कर उन्हें खदान स्वीकृति के बारे में जानकारी दी गई है। उन्होंने भी जल्द निगम के जरिए प्रस्ताव बनवाकर भेजने की बात कही है।
नहीं पहुंचा नगर निगम का कोई अधिकारी
रेत की अवैध खुदाई को लेकर जहां खनिज विभाग के अधिकारी शाम को मौके पर पहुंचकर जांच की लेकिन इस दौरान निगम का कोई भी अफसर यहां नहीं पहुंचा। गौरतलब है कि शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर महापौर से लेकर निगम आयुक्त वार्ड का भ्रमण कर रहे हैं लेकिन नदी में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं जाता।
एक माइनिंग इंस्पेक्टर के भरोसे पूरा जिला
खनिज विभाग में इस समय कर्मचारियों की कमी है। दो माइनिंग इंस्पेक्टर के पदों की स्वीकृति के बाद भी यहां एक ही इंस्पेक्टर पूरे जिले का कामकाज देख रहा है। उपसंचालक खनिज आरसी नेताम ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के बाद भी जांच और कार्रवाई प्रभावित न हो इसके उपाय किए गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में एक और माइनिंग इंस्पेक्टर की पदस्थापना यहां पर होगी।