माफिया अवैध रेत निकालने कर रहे महिलाओं का उपयोग
रेत का अवैध खनन करने वाले रेत माफिया पर प्रशासन रोक लगाने का लाख दावा करता है, लेकिन प्रशासन ही इस दावे पर नाकाम साबित हो रहा है। रेत के दाम इस समय आसमान छू रहे हैं जिसके चलते रेत का अवैध खनन जोरों पर चल रहा है।
खनिज विभाग के अधिकारियों की रोक के बावजूद भी शहर से लगी इंद्रावती नदी में अवैध खनन लगातार जारी है। इस काम में रेत माफियाओं को कोई परेशानी न हो इसलिए वे प्रवीर सहित अन्य वार्ड की महिलाओं का उपयोग कर रहे हैं। कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में कई महिलाएं फावड़ा और कुछ प्लास्टिक की टोकनी से ही रेत निकाल रही हैं। इंद्रावती से रेत निकाल रही महिलाओं को अब तक कोई परेशानी नहीं हो रही है। खनन माफिया के इस अवैध कार्य से नदी किनारे रहने वाले शिव मंदिर, भैरम देव वार्ड और प्रवीर वार्ड के लोगों की मुसीबत आने वाले दिनों बढ़ सकती है। इस रेत के अवैध खनन पर लगाम लगाने वाला खनिज विभाग आंखें बंद किए बैठा है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर विभाग ने रेत की जब्ती की थी लेकिन अभी कार्रवाई करना तो दूर अधिकारी मौके पर जान की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
निगम नहीं कर रहा कोई कोशिश : नगर निगम के ईई एचबी शर्मा ने रेत के अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी खनिज विभाग की है, जिसे वह पूरा नही कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर खनिज विभाग इसे खदान के रूप में स्वीकृति दे देता तो निगम को कुछ आमदनी हो जाती।
जल्द होगी कार्रवाई :उपसंचालक खनिज आरसी नेताम ने कहा कि शहर से लगी इंद्रावती नदी के पुराने पुल के पास हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए कई बार कोशिश की जा चुकी है।
बावजूद इसके रेत की खुदाई में लगे लोगों ने इस काम को फिर से शुरू कर दिया है। इसकी जानकारी मिली है। जल्द ही इसे रोकने के लिए कार्रवाई की जाएगी।
जगदलपुर. इंद्रावती नदी के पुराने पुल के पास बुधवार सुबह ठेकेदार के लिए रेत निकालती महिलाएं।
हर दिन दो से तीन ट्रैक्टर रेत बेच रही हैं महिलाएं
आसनी से कम दाम पर रेत मिले इसलिए रेत माफिया इन दिनों शहर के प्रवीर वार्ड की करीब दो दर्जन महिलाओं का उपयोग कर रहे हैं। रेत की खुदाई करने वाली महिलाओं ने बताया कि जान जोखिम में डाल नदी से वे हर दिन दो से तीन ट्रैक्टर रेत निकालती हैं। दो हजार रुपए प्रति टैक्टर रेत की बिक्री करने वाले रेत कारोबारी उनसे इतनी ही रेत एक हजार रुपए में खरीदकर ले जाते हैं। महिलाओं ने बताया कि नदी से रेत निकालने के लिए चार गैंग बने हैं। हर गैंग में करीब सात से आठ महिलाएं हैं। रेत की निकासी सुबह से लेकर शाम तक की जा रही है। महिलाओं ने बताया कि सालों पहले बैलगाड़ी से लेकर वे ट्रकों में रेत सप्लाई करती थीं। एक ट्रक का 2 हजार और एक बैलगाड़ी रेत का दो रुपए मिलता था।