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अधीक्षक ने कहा- हॉस्पिटल की चाबी किसे सौंपें कोई आदेश नहीं , जरूरी उपकरण भी नहीं लौटाए

3 वर्ष पहले
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मेडिकल कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट करने की होड़ के बीच महारानी हास्पिटल में लोगों को इलाज की सुविधा मिल पाएगी या नहीं अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है। अधीक्षक अविनाश मेश्राम के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को 15 मई तक डिमरापाल के नए भवन में शिफ्ट करने का आदेश प्रमुख सचिव का था लेकिन महारानी हास्पिटल की चाबी किसे सौंपना है इस बारे में उन्हें कोई आदेश नहीं मिला है।

इधर सीएमएचओ देवेंद्र नाग ने बताया कि उन्होंने मेडिकल कॉलेज के शिफ्ट होने के बाद यहां किस तरह व्यवस्था संचालित होगा, इसे लेकर 2 अप्रैल को ही सचिव को डीओ लेटर भेज चुके हैं लेकिन अब तक कोई मार्गदर्शन नहीं मिला है। इन सबके बीच अब भी महारानी हास्पिटल से आवश्यक उपकरणों को हटाए जाने के बाद इनकी वापसी नहीं हो सकी है।

आईसीसीयू से जीवनरक्षक दवाओं को रखने वाली फ्रिज और ईसीजी मशीन तक को मेडिकल कॉलेज के नए भवन में ले जाया गया है। मंगलवार को अधीक्षक डॉ अविनाश मेश्राम ने इसे वापस लाने का निर्देश दिया था, इसके बावजूद यह अब भी डिमरापाल स्थित नए भवन में ही पड़ा हुआ है जिससे आईसीसीयू में भर्ती मरीजों को अपनी ओर से ही व्यवस्था करनी पड़ रही है।

अस्पताल के नए भवन में शिफ्टिंग बनी मुसीबत

नए भवन में रखा आईसीसीयू का फ्रिज जिसे अब तक लाया नहीं गया है।

कांग्रेस ने खोला मोर्चा, कहा-हॉस्पिटल के निजीकरण की तैयारी में है सरकार

कांग्रेस नेता उमाशंकर शुक्ला ने मेडिकल कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया में महारानी हास्पिटल के अस्तित्व को लेकर कोई योजना न होने पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने सांसद-विधायक समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार इसे पीपीपी मोड पर निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी कर रही है। इसलिए अब तक इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया है। यहां तक कि सांसद-विधायक भी सरकार की मंशा को समझ कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए जल्द ही आंदोलन की बात भी कही है।

सेटअप तय लेकिन आदेश का हो रहा इंतजार

इधर प्रमुख सचिव के आदेश के बाद आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने महारानी हास्पिटल से सभी जरुरी सामग्री को मेकॉज के नए भवन में शिफ्ट कर दिया है। लेकिन वहां अब तक इलाज शुरु नहीं किया जा सका है। महारानी हास्पिटल में पूर्व में 300 बेड का हास्पिटल स्वीकृत था, इसके बाद 100 बेड की और स्वीकृति मिली है। सीएमएचओ के मुताबिक इसके लिए 97 कर्मचारियों का सेटअप भी स्वीकृत है। जिसमें 27 पद डॉक्टरों के हैं। इनमें से 13 पद पर अब भी डॉक्टर पदस्थ हैं। यहां से मेकॉज के शिफ्ट होने के बाद इसकी व्यवस्था भी कर ली जाएगी। लेकिन अब तक शासन से कोई आदेश ही नहीं आया है कि किस तरह यहां हास्पिटल संचालित होगा।

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