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स्वाइप मशीन के जरिए खाद की बिक्री को बढ़ावा देने खाद्य विभाग ने बनाई योजना

3 वर्ष पहले
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जिले में से प्वाइंट ऑफ सेल (स्वाइप) मशीन के बिना उर्वरक बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस मशीन के बिना खाद की बिक्री करने वाले दुकानदारों का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया जाएगा। विभिन्न उर्वरकों पर 25 से लेकर 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है। अनुदान का लाभ किसान को ही मिले इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है। उर्वरक खरीदते समय किसान को पॉस मशीन पर अगूंठा लगाना होगा। उससे एक पर्ची निकलेगी। पर्ची पर अंकित कीमत ही किसानों को देनी होगी। इससे उर्वरक की कालाबाजारी पर भी अंकुश लगेगा।

दुकानदारों को स्वाइप मशीन आईपीएल कंपनी मुहैया करा रही है। इस मशीन को डिजिटलाइजेशन सेवा से जोड़ा जाएगा। उपसंचालक कृषि कपिल देव दीपक ने बताया कि एक दिसंबर 2017 बिना स्वाइप मशीन के खाद बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बना ली गई थी। जांच में बगैर स्वाइप मशीन के खाद बेचते हुए पान उनके लाइसेंस भी निरस्त किया जाएगा। यदि जरूरत होगी तो उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। उन्होने कहा कि पास मशीन जल्द से दुकानदारों को मिले इसके लिए कपंनी के अधिकारियों से चर्चा की जा रही है।

उर्वरक स्टॉक की इंट्री करानी होगी : सभी उर्वरक विक्रेताओं को हर महीने की 25 से 30 तारीख के बीच स्टॉक की इंट्री करानी होगी। जिले के विभिन्न विकासखंडों व अन्य स्थानों पर स्थिति कृषि विभाग के ब्लाक स्तर के कार्यालयों में यह दर्ज किए जाएंगे। बिना स्टॉक इंट्री खाद बेचने पर भी कार्रवाई होगी।

बिना स्वाइप मशीन के खाद बेची तो दुकानों का लाइसेंस होगा निरस्त, एफआईआर भी होगी

52 खाद दुकानों में नहीं पहुंची पॉस मशीन इसकी िजम्मेदारी आईपीएल कंपनी को दी

खरीफ सीजन में इस साल करीब एक लाख 90 हजार हेक्टेयर मं खेती की जाएगी जिसमे सहकारी समितियों और 63 दुकानदारों के माध्यम से करीब 10 हजार क्विंटल खाद बेचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सहकारी समितियों को तो पॉस मशीन उपलब्ध करवा दी गई है लेकिन अब तक जिले के 52 दुकानदारों को मशीन नहीं मिली है। पॉस मशीन को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य शासन ने आईपीएल कंपनी को सौंपी है। इसमें से अब तक 11 दुकानदारों को ही अब तक मशीन उपलब्ध करवाई गई है। अन्य दुकानदारों के पास यह मशीन कब तक पहुंचेगी इसको लेकर कोई जानकारी कंपनी के अधिकारियों ने कृषि विभाग को नहीं दी है।

आधार बन सकता है मुसीबत

पॉस मशीन से खाद खरीदने के लिए किसानों को आधार लिंक कराना जरूरी होगा। ऐसा नहीं होने पर उसे उर्वरक नहीं मिलेगा। इससे किसानों को दिक्कत का सामना भी करना पड़ सकता है। गांवों में काफी लोगों के आधार कार्ड नहीं हैं। इस कारण उन्हें खाद नहीं मिल सकेगा। कुछ किसान आधार की अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं। किसान तुलाराम, सुंदर और सकालूराम के साथ ही आयतूराम ने कहा कि फसल की बुवाई के समय खाद खरीदने के लिए अन्य किसी भी व्यक्ति को भेज दिया जाता था, लेकिन अब काम को छोड़कर खाद लेने स्वयं जाने से मुसीबत हो जाएगी। जिनके आधार कार्ड नहीं बन पाए हैं उनके कार्ड बनवाए जाने की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की जाए।

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