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1 लाख 17 हजार गरीब परिवारों को इलाज कराने में नहीं होगी परेशानी

3 वर्ष पहले
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पैसे की कमी के कारण इलाज के अभाव में अब लोगों की जान नहीं जाएगी। इसके लिए भारत सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत जिले के करीब एक लाख 17 हजार परिवारों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिलेगा।

योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के सभी ब्लाकों में सर्वे कर लोगों की जानकारी इकट्ठा कर ली गई है। एक अप्रैल 2018 को इस योजना की शुरुआत की गई है। मेडिकल एवं स्वास्थ्य संबंधित इस नई योजना का लाभ हर गरीब परिवार को देने के लिए पिछले एक महीने से गरीबों का सर्वे किया जा रहा था। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय बीमा योजना में पहले एक लाख रुपए की धनराशि मदद के तौर पर दी जाती थी, लेकिन अब इस राशि को बढ़ाकर भारत सरकार ने पांच लाख रुपए कर दिया है। इस योजना के लिए 60 प्रतिशत केंद्र सरकार तथा 40 फीसदी खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी। योजना का लाभ लेने वालों में सबसे अधिक करीब 15 हजार लोग केवल जगदलपुर ब्लाक से हैं। बाकी के ब्लाकों में यह संख्या 6 से 10 हजार के बीच है।

चयन का आधार बनी 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना की सूची: आयुष्मान योजना की शुरूआत छग के बीजापुर से हुई थी। इस योजना में जिन लोगों को लाभ दिया जा रहा है उनका चयन भारत में वर्ष 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना की सूची के आधार पर किया गया है। स्मार्ट कार्ड योजना प्रभारी पृथ्वी साहू ने बताया कि योजना में जिन गरीब परिवारों को शामिल किया गया है उनकी सूची विभाग को कुछ दिनों पहले मिल चुकी है। सूची का सत्यापन पूरा कर लिया गया है। योजना शुरू होने के साथ ही अब आने वाले दिनों में मरीजों की सूची का सत्यापन आधार कार्ड के जरिए किया जाएगा और इसकी जानकारी बीमा कंपनी के अधिकारियों को दी जाएगी। इस समय इस सूची को ऑनलाइन करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद इस सूची को केंद्र शासन को भेजा जाएगा। जहां से स्वीकृति मिलने के बाद इस योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

यह शर्तें हैं आयुष्मान भारत योजना की

जो कच्ची दीवार वाले एक कमरे वाले कच्चे मकान या छप्पर में रह रहा हो।

ऐसे परिवार, जिनमें 16 से 59 वर्ष की उम्र तक का कोई वयस्क सदस्य न हो।

ऐसे परिवार, जिसकी जिम्मेदारी कोई महिला संभाल रही हो

शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति, जिसके परिवार में कोई भी शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति न हो

एससी एसटी परिवार और भूमिहीन परिवार ,जिनकी आजीविका का मुख्य स्रोत मानवीय श्रम हो।

इसके अलावा बेघर व्यक्ति ,निराश्रित व्यक्ति, भिक्षा मांगकर आजीविका चलाने वाला, साफ सफाई करने वाले परिवार, बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए व्यक्ति।

30 वेलनेस सेंटर बनेंगे जिले में

गरीबों को स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार की सुविधा मिले इसके लिए जिले के सात ब्लाकों में 30 वेलनेस सेंटर बनाए जाएंगे। सीएमएचओ डॉ देवेंद्र नाग ने बताया कि यह प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। जहां से अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति नहीं मिलने के बाद भी स्थानीय स्तर से प्रयास करते हुए इस योजना काे सफल किया जाएगा। वैलनेस सेंटर में उपचार आरएमए और एमबीबीएस डाक्टर्स के द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस सेंटर में मरीजों को दवाएं और जांच की सुविधा मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाएगी।

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