जिले में 10 मई से तीन सूत्रीय मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे मितानिन, मास्टर ट्रेनर व अन्य कर्मचारियों ने रविवार को गोंडी व हल्बी बोली में गीत गाकर विरोध प्रदर्शन किया। मितानिनों ने कहा कि वे शासन की हर योजना में अपना योगदान देती हैं। इसके बदले में सरकार से मिलने वाली सुविधाएं काफी कम हैं जिसको लेकर वे नाराज हैं।
समय-समय पर दी जाने वाली सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर उन्होंने राज्य शासन को चेताने की कोशिश की जो कामयाब नहीं हो सकी है। हर दिन बढ़ रही महंगाई के बीच जो राशि राज्य सरकार के द्वारा दी जा रही है वह काफी कम है। उसमें बढ़ोत्तरी को लेकर यह धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। मितानिनों ने कहा कि उनके साथ हो रहे छलावे की जानकारी देने के लिए रायपुर में सोमवार को महारैली होगी। जिसमें बस्तर जिले के सैकड़ों मितानिनें शामिल होकर अपना विरोध जताएंगी।
मितानिन संघ की जिलाध्यक्ष लवलीना पांडे ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती तब यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मितानिनों के नहीं होने से सबसे ज्यादा स्वास्थ्य की कई योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। सबसे अधिक असर संस्थागत प्रसव को लेकर हो रहा है। कई महिलाएं मितानिनों के नहीं होने से समय पर हास्पिटल नहीं पहुंच पा रही हैं। पांडे ने कहा कि जिन मांगों को लेकर हम धरना प्रदर्शन कर रहे हैं उसमें 100 प्रतिशत राज्यांश के अतिरिक्त मितानिन प्रशिक्षकों, ब्लाक समन्वयकों और स्वस्थ पंचायत समन्वयकों व एरिया समन्वयकों को राज्य अंशदान की 75 प्रतिशत राशि व प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत बढ़ाना शामिल है।
जगदलपुर। गोंडी व हल्बी में गीत गाकर विरोध करती मितानिनें।