दंतेवाड़ा| दंतेवाड़ा में फूलों की खेती की संभावना अधिक है, यहां किसानों ने रुचि भी दिखाई और विभाग ने प्रयास भी किया, फूलों की पैदावार भी अच्छी हुई लेकिन किसानों को फूलों के लिए उचित बाजार नहीं मिल पाया।
ऐसे में किसानों की रुचि घटी और दंतेवाड़ा में यह योजना फ्लाॅप हो गई। यहां फागुन मड़ई, वीआईपी प्रवासों या अन्य बड़े कार्यक्रमों में दूसरे जिलों व राज्यों से मंगाए जाते हैं। दरअसल बीते नवंबर-दिसंबर महीने में दंतेवाड़ा के टेकनार, बालपेट व कासोली में फूलों की खेती की शुरुआत की गई थी। उद्यानिकी व कृषि विज्ञान केंद्र के अफसरों के मार्गदर्शन में इन तीनों गांवों के किसानों ने करीब 2 एकड़ की जमीन पर फूलों की खेती की थी, पैदावार भी अच्छी हुई थी लेकिन इसे बेचने किसानों को बाजार नहीं मिल सका। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक डिकलेश ने बताया कि तीन गांवों में इसकी शुरुआत हुई थी। रायपुर, जगदलपुर व दंतेवाड़ा में बाजार उपलब्ध कराने कोशिश हुई थी लेकिन अच्छा मार्केट नहीं मिल सका।
अध्ययन-भ्रमण के बाद आया था विचार: दरअसल पिछले साल जिला पंचायत अध्यक्ष कमला नाग सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों का दल गुजरात भ्रमण पर गया था। जहां किसानों द्वारा की गई फूलों की खेती देखने के बाद दंतेवाड़ा में भी यह प्रयोग कर किसानों को लाभ देने विचार हुआ। स्थानीय स्तर पर इसका प्रयोग भी शुरू किया गया, लेकिन यह सफल नहीं हो सका। कासोली निवासी जिला पंचायत सदस्य चैतराम अटामी ने बताया कि तीन गांवों में फूलों की खेती की गई थी। लेकिन बाजार भाव नहीं मिल सका। विभागीय अफसरों ने इसके लिए ज्यादा रुचि नहीं दिखाई, यदि दिखाई होती तो यहां बाजार भाव मिल सकता था।
1 गुलाब की कीमत 20, पर किसानों को 5 रुपए का भाव नहीं मिल पाया
गुलाब की 2 अलग किस्म व गेंदा फूल की खेती हुई थी। मार्केट नहीं मिला तो कई फूल खराब हो गए। कासोली के रहने वाले चैतराम अटामि ने बताया कि जिस तरह पैदावार हुई, उस समय बाजार में अच्छे भाव मिलते तो 2 एकड़ में भी करीब 40 से 50 हजार रुपए आसानी से किसान कमा सकते थे। एक गुलाब की कीमत मार्केट में फिलहाल 15 से 20 रुपए है। किसानों को 5 रुपए का भाव भी नहीं मिल सका। इससे 30 से 35 हजार का नुकसान किसानों को उठाना पड़ा।