शहर की करीब 25 हजार हजार परिवारों के लिए जीवनदायिनी के रूप में स्थापित इंद्रावती नदी में रेत का अवैध उत्खनन थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में अधिकांश इलाके की सिंचाई, जल आवर्धन और अमृत योजना का आधार इस नदी पर इन दिनों खनिज माफिया शासकीय अमले से मिलीभगत कर लगातार अवैध उत्खनन कर रहे हैं। खासतौर से नदी पर बनाए गए पुल से इन दिनों अवैध खनन का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। जिला खनिज अधिकारी के बार-बार कहने के बाद भी माइनिंग इंस्पेटक्टर इस काम को छोड़ अन्य कार्यों में जुटे हुए हैं।
जिसका फायदा रेत माफिया महिलाओं के जरिए उठा रहे हैं। गौरतलब है कि इस समय नदी से निकाली गई रेत का उपयोग सरकारी और गैर सरकारी कार्यों में किया जा रहा है। खदान से खरीदी जाने वाली रेत काफी महंगा होने से कई ठेकेदार इन दिनों महिलाओं से प्रति ट्राली एक हजार रुपए में रेत खरीद रहे हैं। बावजूद इसके माइनिंग आफिसर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। रविवार को रेत की निकासी के लिए पहुंची महिलाओं ने बताया कि रेत की निकासी रोकने लिए अब तक कोई नहीं पहुंचा है। रेत की मांग पिछले कुछ दिनों से बड़े पैमाने पर हो रही है। जिसे पूरा करने के लिए वे सुबह से लेकर शाम तक नदी से रेत निकाल रही हैं। एक दिन में आसानी से दो से तीन ट्रैक्टर रेत की बिक्री की जा रही है।
जिला खनिज अधिकारी आरसी नेताम ने कहा कि माइनिंग इंस्पेक्टर को अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए कई बार कहा जा चुका है। बावजूद इसके यह काम अब तक क्यों नहीं रूका इस संबंध में जल्द ही माइनिंग इंस्पेक्टर्स से बात की जाएगी। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर नदी से अवैध खनन को रोकने के लिए एक टीम का गठन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
माफिया इंद्रावती को चीर रहे, जिम्मेदार बेखबर
जगदलपुर। इंद्रावती से रेत का उत्खनन करतीं महिलाएं।
जान जाने का बना है डर
अपने फायदे के चक्कर में खनन माफिया यह भूल चुके हैं कि उनके इस अवैध कार्य से लोगों की जान भी जा सकती है। कुछ दिनों पहले जगदलपुर ब्लाक के आड़ावाल में ऐसा ही एक मामला सामने आया था जब कुछ लोगों ने एक तालाब से बिना पंचायत की स्वीकृति लिए ही बड़े पैमाने पर मुरूम निकाल लिया था। अनजाने में इस तालाब में नहाने गए बच्चों में कुछ की मौत हो गई थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने इस तालाब के आस-पास हो रही मुरूम की खुदाई को रुकवा दिया था। यह हाल कमोबेश इंद्रावती नदी का है। कम समय में अधिक फायदा लेने के लिए महिलाएं नदी में जगह-जगह से रेत निकाल रही हैं। कुछ जगहों पर रेत की निकासी के चलते नदी की धारा में भी बदलाव आने की बात कही जा रही है।