पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • 7वां वेतनमान मिलने के आश्वासन के बाद लैम्प्स के कर्मचारियों ने खत्म की हड़ताल

7वां वेतनमान मिलने के आश्वासन के बाद लैम्प्स के कर्मचारियों ने खत्म की हड़ताल

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जगदलपुर | सातवां वेतनमान देने और सरकारी कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग को लेकर 2 जुलाई से धरने पर बैठे लैंप्स कर्मचारियों की मांगों में से राज्य सरकार ने उनकी पहली मांग पूरी करने का आश्वासन दिया है। लेकिन दूसरी मांग पर सहमति नहीं दी है। पहली मांग पूरी होने का आश्वासन मिलने के बाद लैंप्स कर्मचारियों ने पिछले पांच दिनों से चली आ रही हड़ताल को खत्म कर दिया है।

बस्तर जिले के आदिम जाति सहकारी सेवा समिति के अध्यक्ष महेश देवांगन ने बताया कि सीएम डॉ रमन सिंह ने सातवां वेतनमान देने की मांग को एक महीने के अंदर पूरा करने का आश्वासन दिया है। लेकिन उन्होंने सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग को अस्वीकार कर दिया। सीएम के सातवां वेतनमान देने के आश्वासन के बाद कर्मचारियों की बैठक शुक्रवार को हुई जिसमें आंदोलन को खत्म करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि एक महीने के अंदर सातवां वेतनमान नहीं दिया जाता है तो एक बार फिर से लैंप्स के कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसकी चेतावनी राज्य सरकार को दी गई है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के विपणन अधिकारी आरबी सिंह ने बताया कि सहकारी समितियों के जरिए किसानों को कर्ज देने का जो लक्ष्य मिला है उसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। लैंप्स के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने का असर हुआ था। जल्द ही किसानों को शासन से जारी निर्देश और नियमानुसार कर्ज दिया जाएगा।

यह है स्थिति इस समय

इस साल 37 सहकारी समितियों के जरिए किसानों को 7776 क्विंटल बीज बांटने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से अब तक समितियों ने केवल 5860 क्विंटल ही बांट पाया है।

खाद-बीज बांटने और कर्ज देने में आएगी अब तेजी

50% कर्ज बांटा था सहकारी समितियों ने
राज्य सरकार ने इस साल जिले के किसानों को 100 करोड़ रुपए कर्ज देने का निर्णय सहकारी समितियों के जरिए लिया है। लेकिन कर्मचारियों के दो सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर चलने जाने से जहां कई किसानों को खाद व बीज समय पर नहीं मिल पाया तो वहीं हजारों किसान समितियों से बिना ब्याज के मिलने वाले कर्ज में से केवल 50 करोड़ ही ले पाए। इसके अलावा कई किसानों ने प्राइवेट बैंकों से कर्ज लेकर खेती की है।

खबरें और भी हैं...