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तृतीय-चतुर्थ वर्ग के पदों पर भर्ती नहीं, विरोध शुरू

3 वर्ष पहले
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जगदलपुर. भर्ती नहीं होने से नाराज दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कुलपति और कुलसचिव के खिलाफ नारेबाजी करते।

जगदलपुर | बस्तर में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने बस्तर विश्वविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर भर्ती नहीं होने के विरोध में मंगलवार को आंदोलन शुरू किया। सभी कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। दैवेभो कर्मचारी संघ के सहसचिव कन्हैयालाल पटेल ने कहा कि एक ओर अकादमिक भवन में शिक्षकों के लिए बैठने की जगह नहीं है। ऐसी स्थिति में बस्तर विश्वविद्यालय करोड़ों का मासिक वेतन देकर प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया है और कर्मचारियों की भर्ती में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

संघ के सहसचिव कन्हैयालाल ने कहा कर्मचारियों की कमी से बस्तर विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों में कार्य का भारी दबाव है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रबंधन शासन को ही वित्तीय अनुमति नहीं देने का आरोप लगाता रहेगा तो बस्तर विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की भर्ती नहीं हो पाएगी। मुख्यमंत्री डाॅ. रमनसिंह ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए 2012 में बस्तर विश्वविद्यालय को कर्मचारियों की 111 पदों की स्वीकृति दी थी। इसके साथ ही बस्तर विश्वविद्यालय ने 2012 में ही 90 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जो आज तक नहीं भरे गए हैं। यदि बजट में पदों की स्वीकृति दी गई थी तो विश्वविद्यालय के अधिकारी वित्तीय अनुमति का रोना क्यो रो रहे हैं।

रैली निकालकर सीएम के नाम देंगे ज्ञापन

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का कहना है कि तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर भर्ती के लिए यदि विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा पहल नहीं किया जाएगा तो आगामी दिनों में विश्वविद्यालय परिसर से बाइक रैली निकालेंगे और युवा आयोग अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। इस दौरान दैवेभो कर्मचारी संघ के जिला कोषाध्यक्ष मदन प्रधान, राजेंद्र ठाकुर, राजेश यादव, रमेश केवट, सतीश साहू, आकाश दीप, रामविलास, अखिलेश मंडावी, परस साहू, राजेंद्र यादव आदि मौजूद थे।

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