आरटीओ में 1 माह से काम ठप, लाइसेंस बन रहे न बसों को परमिट मिल रहा
जगदलपुर | नए साफ्टवेयर आने के बाद भी आरटीओ दफ्तर में एक माह से कामकाज ठप है। इसके चलते अब तक 125 से ज्यादा पुराने आवेदकों का लाइसेंस नहीं बन पाया है। इतना ही नहीं शादी-ब्याह के सीजन में यात्री बसों के लिए परमिट जारी नहीं होने से लोगों को बारातियों के लिए दूसरे वाहन तलाशने पड़ रहे हैं। 8 अप्रैल से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में काम ठप होने से विभिन्न कार्यों से संबंधित 300 पुराने आवेदनों का निपटारा नहीं हो सका है। नए सारथी साफ्टवेयर को इंस्टाल करने में ही पंद्रह दिनों का समय लग गया। किसी तरह इसे इंस्टाल तो किया गया, लेकिन इसे सही ढंग से चलाने में स्टाफ को समय लग रहा। इसके चलते पुराने आवेदनकर्ता आरटीओ दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। दरअसल नए साफ्टवेयर के आने के पहले जिन लोगों ने ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण या डुप्लीकेट लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, उनका आवेदन नए साफ्टवेयर में आगे ही नहीं बढ़ पा रहा है।
इसे अपडेट करने के बाद फिर से नए सिरे से आवेदन करने के बाद भी लोगों को दोबारा बायोमेट्रिक करवाना पड़ रहा है। सही जानकारी के अभाव में अब भी यहां सैकड़ों लोग रोज एजेंटों और दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार व बस्तर संभाग के आयुक्त दिलीप वासनीकर के मुताबिक विकास यात्रा और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में अफसरों के व्यस्त रहने के कारण कुछ काम अटके होंगे, अगले दो दिनों में इसे ठीक कर लिया जाएगा।
लाइसेंस नहीं होने पर क्षतिपूर्ति राशि नहीं देती है बीमा कंपनी
लाइसेंस की समय सीमा खत्म होने के बाद परिवहन विभाग एक महीने का ग्रेस पीरियड संबंधित लाइसेंसधारक को देता है। इस अवधि के बाद उसे पेनाल्टी देना होता है। इसके अलावा यदि लाइसेंस की वैधता की अवधि खत्म हो जाने के बाद यदि कोई दुर्घटना हुई तो बीमा कंपनी भी क्षतिपूर्ति देने से मना कर देती है। वाहन बेचे जाने के बाद इसके स्वामित्व में परिवर्तन के लिए भी सौ से ज्यादा आवेदन दफ्तर में अटके पड़े हैं।
नए साफ्टवेयर में सभी के लिए बायोमेट्रिक जरूरी
परिवहन विभाग के नए साफ्टवेयर में अब एनओसी, लाइसेंस का रिनुअल, डुप्लीकेट लाइसेंस समेत तमाम कार्यों के लिए बायोमेट्रिक अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बगैर काम आगे ही नहीं बढ़ेगा। पूर्व में एक बार बायोमेट्रिक हो जाने के बाद दोबारा इसकी जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन अब हर बार आवेदन के बाद संबंधित आवेदक को बायोमेट्रिक करवाना ही होगा।