शिक्षण संस्थानों में एक कालांश संस्कारों का भी होना चाहिए
प्रत्येक शिक्षण संस्थान को विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण पर अहम भूमिका अदा करनी चाहिए। मनुष्य तो जन्म से बन जाता है लेकिन मनुष्यता प्राप्त करने में पूरा जीवन लग जाता है। भारतीय व्यक्ति पाश्चात्य संस्कृति की दौड़ में अपने जीवन को व्यर्थ में गंवा रहा है। प्रत्येक शिक्षण संस्थान को व्यक्ति विकास हेतु कार्य करना चाहिए तथा कक्षा विषयों के अतिरिक्त कम से कम एक सप्ताह में एक कालांश संस्कार देने का भी होना चाहिए। ये विचार मानसरोवर स्थित अपेक्स इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट एंड साइंस में आयोजित विशेष व्याख्यान में संत किरीट भाई महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने इंस्टीट्यूट के मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को धर्म, संस्कृति, नैतिकता और संस्कार का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कह कि प्रत्येक मनुष्य को जीवन में अर्थशास्त्र के उपयोगिता वक्र की तरह एक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पुनः अधोगामी होना पड़ता है। उन्होंने धन को गौण बताया और कहा कि पैसे से सुख-सुविधा के सामान खरीदे जा सकते हैं पर शांति प्राप्त नहीं की जा सकती।