सिंहावलोकन में दिखी 1935 से 2005 में बनाई गईं कलाकृतियां
प्रकृति के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती कलाकृतियों को एग्जीबिशन में डिसप्ले किया गया है। ललित कला अकादमी में मंगलवार को शुरू हुई सिंहावलोकन एग्जीबिशन में स्व देवकी नंदन शर्मा की बनाई गई करीब 75 कलाकृतियों को एग्जीबिट किया है। इनमें देवकी नंदन की 1935 से लेकर 2005 तक बनाई गई कलाकृतियां शामिल हैं। कलाकृतियों में मुख्य रूप से जंगल, पेड़, पौधे, पशु और पक्षियों, लैंड स्केप की झलक देखने को मिली। इनमें कमल के फूल से लेकर उडहुल के फूलों के रंग शामिल हैं।
देवकी नंदन शर्मा के बेटे भवानी शंकर शर्मा द्वारा संग्रहीत इन कलाकृतियों में कई तरह की तकनीक देखने को मिली। जिनमें फ्रेस्को, वॉश तकनीक, टेम्परा वर्क शामिल है। वॉटर कलर और वॉश तकनीक के साथ कई कलाकृतियों को बनाया है। भवानी शंकर शर्मा ने बताया कि पिता जी ने परताश के काम को लेकर कंटेम्परेरी वर्क किया। वे रंगों और तकनीक पर बहुत ही प्रयोग किया करते थे। बदलते मौसम पर अध्ययन करना उन्हें काफी पसंद था।
मौसम के बदलने के साथ मोर में क्या बदलाव आते थे, मोर के पंखों का रंगों में कैसेे कैस बदलाव आता है? इन छोटी-छोटी चीजों पर वे काफी गौर किया करते थे। इसके साथ ही मौसम के साथ प्रकृति में आने वाले बदलाव को वे रंगों में उकेरा करते थे। राजस्थान के बर्ड्स को उन्होंने कलाकृतियों में चित्रित किया है। मात्र 18 वर्ष की उम्र में एक अलग ही विजन के साथ उन्होंने वनस्थली विद्यापीठ में आर्ट डिपार्टमेंट की शुरुआत की। प्रकृति के हर बदलते स्वरूप पर कला की दृष्टि से अध्ययन किया और फिर उसपर काम किया। एग्जीबिशन 26 अप्रैल तक चलेगी।
स्व. देवकी नंदन शर्मा की 75 कलाकृतियों को एग्जीबिट किया गया