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ब्रेन में इलेक्ट्रोड लगाने से लकवे ग्रस्त पेशेंट में आ सकती है हलचल

3 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



ब्रेन में इलेक्ट्रोड लगाने से लकवे ग्रस्त व्यक्ति की बाहों में हलचल आ सकती है। इन इलेक्ट्रोड की मदद से वे प्रोस्थेटिक लिम्ब को यूज कर पाएंगे। डिवाइस पर लगे सेंसर फिजिकल फीडबैक मिलने पर वे चल भी पाएंगे। क्योंकि ब्रेन के जिस हिस्से में इलेक्ट्रोड को लगाया जाता है। इनसे स्टीमुलेट होने वाले न्यूरोन्स शरीर में सनसनी पैदा करते हैं। पेशेंट्स को अलग-अलग तरीके की सनसनी महसूस होती है। साथ ही हाथों में हलचल शुरू होती है। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की सर्जरी के बाद यदि किसी पेशेंट को लकवा आता है। उन पेशंेट्स में यह इलेक्ट्रोड फायदेमंद साबित होगी। स्टडी में यह देखा गया कि टच, ब्राइवेशन,चुभना, छींकना आदि भी महसूस होता है। रोबेटिक आर्म्स से भी पेशेंट्स खुद चाय का कप आदि उठा सकते हैं। मेडिकल साइंस में पहली बार लकवे ग्रस्त पेशेंट के हाथ में हलचल देखी गई है। लैब में इसे सफलता मिल चुकी है। ये टिनी इलेक्ट्रोड ब्रेन के सोमोटोसेंसरी कॉर्टेक्स में इंप्लांट की जाती है। ये इलेक्ट्रॉड एंडरसन लैब में बनाकर इंप्लांट की गई थी। क्लिनिकल ट्रायल भी इस पर हो चुका है। स्पाइन इंजरी के पेशेंट्स में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। भविष्य में साइंटिस्ट को ट्रीटमेंट में काफी मदद मिलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। एंडरसन लैब में 2015 में ब्रेन मशीन इंटरफेस भी डवलप कर चुकी है। ये मशीन प्रोस्थेटिक रोबोटिक आम को इलेक्ट्रोड से कनेक्ट करते हुए ब्रेन को गवर्न करेगी।

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