लंबी जिंदगी जीने के लिए वर्चुअल नहीं, रियल वर्ल्ड में जीएं
हैल्थ रिपोर्टर जयपुर
लंबी जिंदगी जीने के लिए वुर्चअल वर्ल्ड (स्मार्टफोन और इंटरनेट की दुनिया) मंे ज्यादा वक्त नहीं बिताएं। रियल वर्ल्ड में समय बिताएं। आजकल वर्चुअल वर्ल्ड में जीना अकेलेपन की बड़ी वजह रहा है। जिसके चलते एडल्ट ही नहीं यंगस्टर्स में भी डिप्रेशन आ रहा है। वे लोग एडिक्शन सहित कई अन्य बुरी आदतों को अपना रहे हैं। लंबे समय तक इस दुनिया में रहने के बाद मनोचिकित्सकों से वर्चुअल वर्ल्ड से बाहर आने के लिए थेरेपी ले रहे हैं। मनोचिकित्सकों के मुताबिक, आजकल लोगों में अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है। जिसके चलते वे डिप्रेशन के अलावा कई अन्य बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। उनकी जिंदगी कम हो रही है। इसलिए हैल्दी के साथ साथ लंबी जिंदगी जीने के लिए लोगों को वर्चुअल वर्ल्ड से बाहर निकलना होगा। अकेलापन एडल्ट और बुजुर्गों की प्रॉब्ल्म नहीं रही है। बल्कि युवाओं में यह प्रॉब्ल्म ज्यादा हो रही है। जिसके चलते उनमें डिप्रेशन, एंग्जाइटी सहित कई तरह के मेंटल डिसऑर्डर देखने को मिल रहे हैं।
अकेलापन बुजुर्गों में ही नहीं, यंगस्टर्स के लिए भी डिप्रेशन, एंग्जाइटी और हार्ट डिजीज का रिस्क फैक्टर बन रहा है, इससे उम्र घट रही है
युवाओं में अकेलेपन के कारण
जॉब का दबाव होने के कारण दोस्तों के साथ समय नहीं बिता पा रहे हैं। अपनी परेशानियां शेयर नहीं कर पाते, इस वजह से भी अकेलापन बढ़ रहा है।
बचाव के तरीके
30 से 35 साल की उम्र में जॉब के अलावा दोस्तों के साथ भी वक्त बिताएं।
ओल्ड ऐज में पार्टनर की डेथ होने के कारण अक्सर अकेलापन महसूस होता है। बच्चे उन्हंे पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। इस वजह से उनकी उम्र तो कम होती है। साथ ही वे एंग्जाइटी से ग्रसित रहते हैं।
बचाव : ओल्ड ऐज होम और क्लब में समय बिताएं।
वर्चुअल से रियल वर्ल्ड में कैसे आएं : पेशेंट्स को कोग्नेटिव थेरेपी देते हैं ताकि सोच में बदलाव लाया जा सके। अकेलेपन के कारण एडिक्शन डवलप होने पर दवाइयाें से ट्रीटमेंट करते हैं।
अकेलेपन से होने वाली बीमारियां
64%
अकेलेपन का ब्रेन पर असर पड़ता है। स्ट्रेस हॉर्माेन कार्टिसोल का असर सुबह होता है। यह पूरे दिन सामान्य नहीं हो पाता है। डिमेंशिया जैसे न्यूरोडिजनरेटिव डिसऑर्डर की रिस्क बढ़ जाती है। ओल्ड ऐज होम और नर्सिंग होम्स में अकेले रहने वाले लोगों में डमेंशिया होने का खतरा ज्यादा है। 64% तक यह रिस्क बढ़ जाती है।
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तक डिमेंशिया का रिस्क
हार्ट डिजीज का रिस्क : लगतार अकेले रहने से इंफ्लेमेशन बढ़ता है। यह हार्ट के टिश्यूज और ब्लड वैसल्स को डैमेज करते हुए हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कार्डियोवस्कुलर डिजीज बढ़ाता है।
उम्र घटाता है : प्री-मैच्योर डेथ का एक बड़ा कारण अकेलापन है। स्टडीज के मुताबिक कॉम्पिलिकेशन की वजह से अर्ली डेथ होती है।
-डॉ. योगेश सतीजा, मनोचिकित्सक, एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर
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