पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • मां का बनाया खाना ही कुपोषण का इलाज

मां का बनाया खाना ही कुपोषण का इलाज

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इसी मुद्दे पर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) राजस्थान ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. सी. बी. दास गुप्ता से सवाल-जबाव

हैल्थ रिपोर्टर जयपुर। हमारे राज्य में अभी भी बच्चे मालन्यूट्रिशन (कुपाेषण) से ग्रसित हैं। इस वजह से बच्चों मंे कई बीमारियां और डिसऑर्डर हो रहे हैं। जिसके चलते वे सोसायटी का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं।

कितने परसेंट बच्चे मालन्यूट्रिशन से ग्रसित है?

जबाव : 20 परसेंट बच्चे सीवियर मालन्यूट्रिशन से ग्रसित हैं। इन बच्चों को ट्रीटमेंट और सुधार की आवश्यकता है।

मालन्यूट्रिशन की वजह क्या है?

बच्चों को किस तरह का न्यूट्रिशियन देना चाहिए। इस बारे में मां और गवर्नमेंट को अवेयरनेस नहीं है।

कुपोषण खत्म करने के लिए क्या किया जा रहा है?

हाल ही में गवर्नमेंट की ओर से मल्टी नेशनल कंपनियों केे सप्लीमेंट्स देना शुरू किया गया हैं।

क्या इन सप्लीमेंट्स को देने से कुपोषण खत्म होगा?

यह सप्लीमेंट्स और फूड बांटने से बच्चों में साइको और सोश्यल बिहेवियर डवलप नहीं हो पाएगा। ना ही बच्चों में किसी तरह का सुधार आएगा।

बतौर डॉक्टर इसका विकल्प क्या होना चाहिए?

मां के हाथ से बना हुआ खाना खिलाया जाए। पहले की तरह ही आंगनबाडी केंद्रों में होम बेस्ड खाना सप्लाई किया जाना चाहिए।

आईएपी इन सप्लीमेंट्स के विरोध में क्याें हैं?

यह विरोध नहीं है। मेडिकल सांइस के मुताबिक, जब तक मां और परिचित के हाथ से बना होम बेस्ड खाना नहीं खिलाया जाएगा। तब तक यह प्रॉब्लम खत्म नहीं होगी।

खबरें और भी हैं...