बच्चों में चश्मे के माइनस नंबर बढ़ने की ग्रोथ रेट होगी कंट्रोल
हैल्थ रिपोर्टर जयपुर
बच्चों में चश्मे का माइनस नंबर बढ़ने की ग्रोथ रेट कम हो पाएगी। यह ग्रोथ रेट आंखों में कुछ नई तरह की आई ड्रॉप डालने से कंट्रोल होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा उन बच्चों को मिल पाएगा, जिन्हें नंबर बढ़ने की वजह से मेडिकल में अनफिट कर दिया जाता था। हाल ही में सिंगापुर और चीन में हुई स्टडी में यह सामने आया है। बच्चों के चश्मे का नंबर माइनस होना मायोपिया कहलाता है। 80% चीजें बच्चे आँखों के ज़रिए ही सीखते हैं। वही, अगर चश्मा नहीं लगाने पर बच्चों में लर्निंग प्रोसेस कम हो जाता है। इससे बच्चे की ग्रोथ और डवलपमेंट को नुकसान पहुंचता है।
दवाई से कंट्रोल होगा नंबर का बढ़ना
बच्चों में जितने छोटी उम्र में माइनस नंबर लगता है। उतने ही उसके नंबर बढ़ने के चांस बढ़ जाते हैं। लेकिन एक आई ड्रॉप 12 से 13 साल तक लगातार इस्तेमाल करके नंबर को बढ़ने से रोका जा सकेगा। इससे जो बच्चे चश्मे के कारण मेडिकल टैस्ट पास नहीं कर पाते हैं। वे दवाई के इस्तेमाल से अपने बढ़ते नंबर को रोक कर मेडिकल में फिट हो सकेंगे।
गेम्स नहीं खेलने से भी आता है माइनस नंबर
अक्सर बच्चों के बढ़ने के साथ-साथ उनके चश्मे का नंबर भी बढ़ता रहता है। नंबर बढ़ना बच्चे की ग्रोथ पर डिपेंड करता है। वहीं अगर बच्चे आउटडोर एक्टिविटीज कम करते हैं। घर के अंदर खेलते हैं तो यह भी माइनस नंबर बढ़ने का एक कारण हो सकता है। 5 से 6 घंटे की आउटडोर गेम्स बच्चे के चश्मे के नंबर बढ़ने से रोकता है। -डॉॅ. अंकुर सिन्हा, आई एक्सपर्ट, जयपुर
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