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गूगल पर सर्च करके दवाइयां लेने से बढ़ सकती हैं तकलीफें

3 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



आजकल गूगल और इंटरनेट पर अपनी बीमारी के बारे में जानकारी हासिल करके लोग बिना डॉक्टर की सलाह दवाइयां ले रहे हैं। इससे जाने-अन्जाने में पेशेंट्स ऐसी दवाइयां ले लेते है, जो उन्हें नहीं लेनी चाहिए। इससे वो दवाइयां भी एलर्जी की बड़ी वजह बन रही है।

हार्ट और हाइपरटेंशन की दवाइयां : हार्ट और हाइपरटेंशन की दवाइयां लेने से अस्थमा बढ़ता है। इनमें बीटा ब्लॉकर समूह की टेबलेट या आई ड्रॉप का यूज नहीं करें। ऐस इन्हीबीटर ग्रुप की दवाइयां लेने से दस परसेंट पेशेंट्स में खांसी की तकलीफ बढ़ती है। खांसी होने पर डॉक्टर से परामर्श करें। कई बार अस्थमा कंट्रोल करने वाली दवाइयां एडरिनेलीन एवं हाइड्रोकोरटीसोन भी सल्फाइट मिलाने के कारण अस्थमा की तकलीफ बढ़ा देती है। नेब्यूलाईज करते समय नॉर्मल सेलाइन की जगह साधारण पानी के इस्तेमाल से अस्थमा की तकलीफ बढ़ जाती है। जिन्हंे एस्प्रीन लेने से प्रॉब्लम बढ़ती है, उन्हें प्रिजर्वेटिव रंगों से भी अस्थमा बढ़ सकता है।

अस्थमा पेशेंट्स बीमारी के हिसाब से खुद पेनकिलर एस्प्रीन खाते हैं, यह एलर्जी बढ़ाती है, जबकि पेरासिटामोल सेफ मेडिसीन है
अन्य पेन किलर : डाइक्लोफेनिक सोडियम, आईब्रप्रेफिनए किटारोलेक, नेपरोक्सेन, पायरोक्सी कैम, इन्दोमैथासीन सिलिसिलेट जैसी दवाइयांे के इस्तेमाल से भी अस्थमा की तकलीफ बढ़ जाती है। इसलिए इन पेशेंट्स को ये दवाइयां नहीं लेनी चाहिए। इन पेशेंट्स के लिए पेरासिटामोल सेफ मेडिसीन है। इसे ही पेनकिलर की तरह इस्तेमाल करें।

20% अस्थमा पेशेंट्स में एस्प्रीन टेबलेट और अन्य पेन किलर की वजह से अस्थमा पाया गया। कुछ लोग इस दवाई के प्रति संवेदनशील नहीं होते है।

बचाव कैसे करें

रसोई में हवा बाहर करने वाला पंखा लगाएं। छोंक लगाने से 10 मिनट पहले उसे ऑन करें।

50 ग्राम कालीमिर्च एवं 50 ग्राम मिश्री लेकर पीस लें, ठंडा या खट्‌टा खाने पर दो चुटकी मिश्रण चाटें।

कैसे पहचाने एलर्जी
यदि किसी चीज को खाने से पेशेंट्स को खुजली हो रही है। या फिर सांस लेने में परेशानी हो रही है। ये एलर्जी के लक्षण हैं। ब्लड और स्किन पर टैस्ट करके एलर्जी को डायग्नोस किया जाता है। ब्लड टैस्ट के रिजल्ट प्रॉपर नहीं आने पर एलर्जी का टैस्ट स्किन पर दवाई इंजेक्ट करके किया जाता है। बच्चों की स्किन सेंसिटिव होने से उन पर एलर्जी टैस्ट नहीं किए जा सकते हैं। रिजल्ट भी प्रॉपर नहीं आ पाते हैं। ज्यादातर बच्चों में 5 साल से ज्यादा की उम्र में एलर्जी टैस्ट करते हैं।

-डॉ. अजीत सिंह शक्तावत, एलर्जी एक्सपर्ट, एसएमएस, जयपुर

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