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इस्तगासों को पुलिस अनुसंधान के लिए भेजने से पहले परख लें कोर्ट

3 वर्ष पहले
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राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने अदालतों से कहा है कि कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले इस्तगासों को पुलिस अनुसंधान के लिए भेजे जाने से पहले पूरी तरह से जांच परख लें। कहीं, इस्तगासा दायर करने के पीछे कोई दुर्भावना, गलत इरादा या फिर दबाव बनाने के लिए तो नहीं किया जा रहा है।

अधीनस्थ अदालतों को ऐसे आधारहीन प्रकरणों को रोकने का अधिकार है, जिसका वह इस्तेमाल कर सकते हैंै। पेंडिंग प्रकरणों के निपटारे को लेकर हाईकोर्ट की ओर से जारी गाइडलाइन में यह निर्देश जारी किए गए हैं। शेष | पेज 7



अधीनस्थ कोर्ट में 14 लाख केस पेंडिंग

राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के इस परिपत्र में पुराने प्रकरणों को निपटाने के लिए कई और दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। राज्य की अदालतों में 14 लाख 48 हजार प्रकरण पेंडिंग है। इस लिहाज से प्रदेश का छठा नंबर है।

इस्तगासों में 70% से ज्यादा झूठे

राजस्थान पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013 में करीब 62 हजार केस दर्ज हुए थे, इनमें से 40 हजार मामले पुलिस जांच में झूठे पाए गए। 2014 में 67 हजार केस दर्ज किए गए थे। इनमें से 45 हजार (73%) में पुलिस ने एफआर लगा दी थी। 2017 में 43 हजार 669 प्रकरण इस्तगासे में से 28 हजार 748 प्रकरण यानी 72 फीसदी में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगाई।

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