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सरकार रिव्यू करेगी तो फंसेगी, नहीं करने पर भी विवाद तय

3 वर्ष पहले
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हाल ही लागू हुए संस्कृत सेवा नियम संशोधन पर राज्य सरकार रिव्यू करेगी तो फंसेगी, नहीं करने पर भी विवाद तय है। इस नियम के तहत संस्कृत स्कूलों में संस्कृत के अलावा भी अन्य विषयों के शिक्षक प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य बन सकते हैं। संस्कृत स्कूलों में दूसरे विषयों के शिक्षकों को ये पद नहीं मिले इसके लिए संस्कृत शिक्षक विरोध कर रहे है। वहीं सामान्य विषय के शिक्षक भी राज्य सरकार पर ये दबाव बना रहे है कि वह किसी दबाव में नहीं आए और रिव्यू जैसी कार्रवाई नहीं करें।

इसी मामले में शिक्षकों के एक संगठन सियाराम ने सहकार मार्ग से ज्योति नगर तक रैली निकालकर राज्य सरकार के इस निर्णय पर विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही दिल्ली जाकर विरोध दर्ज करने का एेलान भी किया है। ज्योति नगर के पास इन शिक्षकों ने सभा भी की। वहीं दूसरी तरफ राजस्थान संस्कृत शिक्षा सामान्य विषय शिक्षक संघ ने जेएलएन मार्ग स्थित देराश्री सदन में बैठक करके राज्य सरकार के इस निर्णय का समर्थन किया और इस मामले में रिव्यू नहीं करने की चेतावनी भी राज्य सरकार को दे डाली है। राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के सचिव चंद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि 4 जून को संस्कृत के शिक्षक दिल्ली कूच करेंगे और एमएचआरडी मत्री सहित पूरे केंद्रीय मंत्रीमंडल को राज्य सरकार के इस निर्णय से अवगत कराएंगे। उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी के क्षेत्र सहित उदयपुर संभाग में भी राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएगे। उधर राजस्थान संस्कृत शिक्षा सामान्य विषय संघ के प्रदेशाध्यक्ष कल्याण सहाय मीणा ने कहा कि राज्य सरकार को बाधित करेंगे कि इस निर्णय का रिव्यू नहीं करे। संस्कृत स्कूलों में संस्कृत सिर्फ एक ही विषय है । शेष विषय हिंदी- अंग्रेजी आदि के शिक्षक पढ़ा रहे हैं। ऐसे में वरियता के आधार पर इन शिक्षकों को प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के अवसर उपलब्ध होने में कोई गलत बात नहीं है। सामान्य विषयों के शिक्षक डेढ़ दशक से इस संशोधन में बदलाव की मांग कर रहे थे, जो इस सरकार में संभव हुआ है। गौरतलब है कि पिछले दिनो मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में राजेंद्र राठौड़ ने एक प्रजेंटेशन के बाद इस पर रिव्यू करने की बात कही थी।

संस्कृत सेवा नियमों के विरोध में निकाली रैली

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