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फर्जी सिम फिर भी सटोरियों को मौके पर ही दे दी जमानत

3 वर्ष पहले
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आईपीएल मैचों के दौरान एटीएस ने गत चार दिन में जयपुर में दो बड़े सटोरियों के गिरोह को पकड़ा तो कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच, थानों की स्पेशल टीमों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आईपीएल मैचों के दौरान सटोरियों की निगरानी में कमिश्नरेट की इंटेलीजेंस सिस्टम पूरी तरह से फेल नजर आया। इन मैचों में जयपुर में कुख्यात सटोरियों के सक्रिय होने और कमिश्नरेट की ओर से सूचनाओं को नजरअंदाज करने की जानकारी जब एटीएस तक पहुंची तो सक्रिय हुई एटीएस ने चार दिन में दो बड़े सटोरियों के गिरोह को पकड़ कर 30 लाख से ज्यादा की नकदी बरामद कर मामला कमिश्नरेट को सुपुर्द कर दिया। मगर मिलीभगत का खेल देखिए...सटोरियों के पास जो सिम मिली थी वे फर्जी दस्तावेज से तैयार करके अन्य लोगों के नाम से लेने की जानकारी सामने आई मगर संबंधित थाना पुलिस ने महज सट्टे की धाराओं में ही मामला दर्ज कर औपचरिकता पूरी कर ली। जिसके चलते दोनों ही मामलों में कुख्यात सटोरियों को तत्काल ही जमानत हो गई। जबकि इसी तरह के मामलों में पूर्व में पकड़े गए कुख्यात सटोरिया चंद्रेश उर्फ जूपिटर के पास से अन्य लोगों के नाम से मोबाइल सिम मिली तो कमिश्नरेट ने आईपीसी की धारा 420,467 व 468 में मामले दर्ज किए थे। जिस पर चंद्रेश काफी समय तक जेल में रहा था। इसी तरह के कई मामलों में कमिश्नरेट ने धोखाधड़ी की धाराओं में मामले दर्ज किए हैं।

देर रात तीनों थाना प्रभारियों को हटाया : क्रिकेट सट्टे के बारे में जानकारी नहीं होने व कार्रवाई नहीं करने पर पुलिस कमिश्नर ने सोमवार रात को मानसरोवर थाना प्रभारी सुरेन्द्र सिंह राणावत, अशोक नगर थाना प्रभारी धर्मेन्द्र शर्मा एवं वैशाली नगर थाना प्रभारी भोपाल सिंह भाटी को लाइन भेज दिया। इनकी जगह पर मानसरोवर थाना प्रभारी के पद पर सुनील कुमार,वैशाली नगर में राजेन्द्र रावत एवं अशोक नगर में हेमेन्द्र शर्मा को लगाया है।

एटीएस को सूचना थी...कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच को सूचना नहीं देकर खुद कार्रवाई करोगे तो पकड़ में आएंगे लाखों रुपए

एटीएस के एएसपी बजरंग सिंह को मानसरोवर में स्वर्ण पथ पर एक मकान में 17 मई को सट्टा लगाने की सूचना मिली थी। साथ ही सूचना देने वाले ने कहा था कि मामले में क्राइम ब्रांच को सूचना न देकर खुद कार्रवाई करेंगे तो लाखों रुपए मिलेंगे। तब एटीएस इंस्पेक्टर मनीष शर्मा मौके पर पहुंचे। इसके बाद मामला सत्यापित कर संबंधित मानसरोवर थाना पुलिस को बुलाया और मकान में दबिश दी। सटोरियों के पास से 23 लाख रुपए मिले। कार में छह लाख रुपए मिले। पकड़े गए सटोरिए बनेश बंसल, अरुण कुमार खोहाली, मनीष जैन व सुरेश मीना के पास से 22 मोबाइल मिले। जिनको कुछ घंटों के बाद ही जमानत दे दी। सटोरियों ने कबूला है कि उनके मोबाइल में लगी सिम अन्य लोगों के नाम से है।

जांच एसएचओ कर रहे हैं, 70 मोबाइल मिले, जिनमें अधिकतर में फर्जी सिम मिली मगर मामला दर्ज नहीं किया

एटीएस को फिर सूचना मिली कि सी स्कीम में परिवहन मार्ग पर शिव ज्ञान अपार्टमेंट के बी 104 में कुख्यात सटोरिया विकास खंडेलवाल सहित सात सटोरिए क्रिकेट पर सट्टा लगा रहे है। इस पर एटीएस इंस्पेक्टर मनीष शर्मा फिर मौके पर गए और अशोक नगर थाना पुलिस को बुलाया। दबिश देकर कुख्यात सातों सटोरियों को पकड़कर अशोक नगर थाना पुलिस को सुपुर्द कर दिया। इनके पास से 70 मोबाइल मिले। जिनमें अधिकतर अन्य लोगों के नाम से सिम थी। मगर पुलिस ने सभी सटोरियों की मौके पर ही जमानत दे दी। यह अलग बात है कि 3/4 आरपीजीओ के इस मामले की जांच खुद एसएचओ कर रहे हैं। मगर उन्होंने फर्जी सिम का मामला दर्ज नहीं किया है।

डीसीपी को पता नहीं सटोरियों के पास फर्जी सिम है, बोले: पता करवाते हैं फर्जी है या नहीं

दोनों मामलों में मोबाइल काफी मिले हैं। इनमें अन्य लोगों के नाम से सिम उपयोग में ली जा रही है यह जानकारी नहीं है। पता करवाते हैं की फर्जी सिम है या नहीं। सभी को जमानत दे दी है। विकास पाठक, डीसीपी (क्राइम व साउथ)

कमिश्नर ने कहा : जांच करवा रहे हैं, फर्जी मिली तो केस दर्ज होगा

फर्जी सिम मिली हैं तो मामला दर्ज होना चाहिए। मामला दर्ज नहीं किया यह मेरी जानकारी में नही है। मैं चेक करवाता हूं। इसके बाद शाम को कहा कि सटोरियों के पास जो सिम मिली है, उनकी जांच करवा रहे हैं। फर्जी मिली तो मामला दर्ज करेंगे। संजय अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर

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