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नाटक में पिराेया बुजुर्गों से सुनी कहानियाें का ताना-बाना

3 वर्ष पहले
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नाट्यधर्मी संस्था की अाेर से साेमवार काे रवींद्र मंच पर राजस्थानी भाषा के नाटक करम पजाेखी का दाे दिवसीय मंचन शुरु हुअा। करम पजाेखी वरिष्ठ रंगकर्मी कुलदीप शर्मा का लिखा नाटक है जिसका निर्देशन भी उन्हाेंने ने ही किया है। कुलदीप ने बताया कि इस नाटक में तीन अलग अलग लाेक कथाएं हैं जाे उन्हाेंने कभी अपने बुजुर्गाें से सुनी थी। उन्हीं का ताना-बाना इस नाटक में उन्हाेंने पिराेने की बेहतरीन काेशिश की। पजाेखना ढूंढाड़ी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है अाजमाना। नाटक में इसी शब्द के मंतव्य अलग अलग कथाअाें के जरिए पेश किया गया। नाटक का प्रस्तुतिकरण राजस्थानी भाषा में हाेने की वजह से अल्हड़ अंदाज का था जिसने दर्शकाें का भरपूर मनाेरंजन किया। नाटक में प्रभा शर्मा, कुलदीप शर्मा, शुभम अाचार्य, साेनाली जैन, मधु देवासी, करण महला, अनमाेल दीप अाैर मानसी महावर अादि कलाकाराें ने अभिनय किया।

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