30 लाख किसानों की कर्जमाफी के लिए सरकार को 8 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। सरकार के खजाने में 2 हजार करोड़ रुपए की ही व्यवस्था है। बाकी 6 हजार करोड़ रुपए जुटाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। बाकी पैसों का बंदोबस्त अपेक्स बैंक को करना है। सरकार इसके लिए बैंक गारंटी देने के लिए तैयार है। लेकिन बीते एक सप्ताह से कोऑपरेटिव बैंक के अफसर लोन लेने के लिए अलग-अलग बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन लोन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इधर, एक जून से गांवों में प्रथम चरण के शिविर लगाकर कर्ज माफी प्रमाण पत्र बांटने का ऐलान भी सरकार कर चुकी है लेकिन जिस अपेक्स बैंक को कर्जमाफी के लिए बाजार से कर्जा लेना है उसे अब तक सरकार की ओर से लिखित में कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
मंत्री बोले- नाबार्ड से बात हो गई लोन मिल जाएगा, नाबार्ड बोला- कर्जमाफी के लिए एक पैसा नहीं देंगे
कर्जमाफी को लेकर पैसे का बंदोबस्त कैसे होगा इस पर सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक के दावे धराशाही हो गए। किलक से जब पूछा गया कि कर्जमाफी के लिए पैसा कहां से लाएंगे। इस पर किलक बोले 3 हजार करोड़ रुपए वित्त विभाग देगा। बाकी नाबार्ड ओर एनसीडीसी से लोन लेंगे। नाबार्ड के महाप्रबंधक आर. के. थानवी का कहना है कि नाबार्ड कर्जमाफी के नाम पर एक रुपया भी नहीं देता।
सरकार ने नाबार्ड से लोन रिशेड्यूल करने का आवेदन किया था, नाबार्ड इस पर भी राजी नहीं
थानवी का कहना है कि राज्य सरकार ने सिर्फ रबी में लिए गए फसली ऋण को रिशेड्यूल करने का आवेदन किया था। इसे भी मंजूर किए जाने की संभावना नहीं है क्योंकि सिर्फ अकाल और अन्य किसी तरह की आपदा में ही लोन रिशेड्यूल किए जाने का प्रावधान है।
वित्त विभाग ने कहा- तीन नहीं सिर्फ 2 हजार करोड़ ही देंगे, बाकी लोन के लिए गांरटी देंगे
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश शर्मा का कहना है कि कर्जमाफी के लिए सरकार वित्त वर्ष में सिर्फ 2 हजार करोड़ रुपए ही देगी क्योंकि बजट में इतना ही प्रावधान है। बाकी पैसों का बंदोबस्त करने के लिए सरकार अपेक्स बैंक को लोन गारंटी देगी। इस लोन पर लगने वाले ब्याज को सरकार चुकाएगी। उन्होंने बताया कि आगे आने वाले चार सालों में सरकार 2-2 हजार करोड़ रुपए करके लोन चुकाएगी।
कर्जमाफी के अलावा खरीफ के लिए 10 हजार करोड़ और नाबार्ड को 6 हजार करोड़ भी चुकाना है
अपेक्स बैंक के सामने दिक्कत यह है कि उसे कर्जमाफी के लिए तो कर्ज लेना ही है लेकिन पिछले साल रबी के लिए नाबार्ड से लिए गए कर्ज के 6 हजार करोड़ रुपए भी जून तक चुकाने हैं। इसके अलावा अब खरीफ की बुआई का सीजन शुरू हो रहा है। इसमें भी सरकार को किसानों को 10 हजार करोड़ रुपए बांटने हैं। लेकिन अभी तो कर्जमाफी के लिए ही पैसों का बंदोबस्त करने में पसीने आ रहे हैं। रबी ऋणों की रिकवरी मार्च तक होनी थी लेकिन पिछले दिनों किसानों को राहत देने के लिए रिकवरी पीरियड को बढ़ाकर जून तक कर दिया गया। इससे चलते जो पैसा मार्च तक सरकार के पास आना था वह भी अटक गया। इसके अलावा खरीफ के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का अल्पकालीन फसली भी बांटना है। सरकार के पास तो इसके लिए भी पैसे नहीं है। पिछले साल इसी अवधि तक खरीफ के लिए सरकार करीब 3 हजार करोड़ रुपए का फसली ऋण बांट चुकी थी लेकिन इस बार अब तक सिर्फ 500 करोड़ रुपए का ऋण बांटा गया है।