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एसएमएस अस्पताल में चूहों के काटे तार से शॉर्ट-सर्किट, कैथ लैब में आग

3 वर्ष पहले
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एसएमएस अस्पताल की कैथ लैब में सोमवार को चूहों के तार कुतरने से शार्ट सर्किट हुआ और आग लग गई। गनीमत यह रही कि आग पर नर्सिंगकर्मियों की तुरंत नजर पड़ गई, वर्ना बड़ा हादसा हो सकता था। अाग के बाद लैब में लाए मरीजों को बाहर निकाला और बिजली कनेक्शन काटा गया। लेकिन इतनी देर में 2 कैथ लैब में धुआं भर गया। यहां डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियन मरीजों को संभालते रहे और कुछ स्टाफ टेक्नीशियन के साथ शॉर्ट सर्किट को तलाशता रहा। काफी देर बाद पता चला कि लैब में रखे यूपीएस के वायर चूहों ने काट दिए। चूहों के इधर-उधर भागने के दौरान वायर भिड़ गए और शॉट सर्किट हो गया। वहीं मामले में विभाग के डॉक्टर्स ने चूहों से निजात के लिए कहा है।

3 में से 2 लैब बंद रहीं... एक में इमरजेंसी केस

6 मरीज भर्ती थे, 2 की हो रही थी एंजियोग्राफी, सुरक्षित बाहर निकाला

सोमवार सुबह करीब 9:45 बजे एक कैथ लैब में यूपीएस में जोर से आवाज हुई और चिंगारियों के साथ आग लग गई। पास मे ही नर्सिंग स्टाफ कक्ष में से दो नर्सिंगकर्मी वहां गए तो वहां चिंगारी की वजह से यूपीएस के तारों में आग लगी देखी। उन्होंने शोर मचाया और सभी को बुलाया। तभी वहां बिजली भी गुल हो गई। डॉक्टर्स ने तुरंत सभी मरीजों को उस लैब से निकाला और इलेक्ट्रीशियन को फोन किया। लेकिन 15-20 मिनट में ही दो कैथ लैब में धुआं ही धुआं भर गया। दोनों लैब में एक-एक मरीज का प्रोसेस चल रहा था। दोनों मरीजों को तुरंत तीसरी कैथ लैब ले जाया गया। अन्य मरीज एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी के प्रोसेस में थे तो उन्हें लैब के बाहर भेज दिया, लेकिन नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर संभालते रहे। पांच घंटे बाद नया यूपीएस लगाया गया और शाम पांच बजे तक ही सब सामान्य हो सका।

अस्पताल का दावा : आज होगी सर्जरी

अस्पताल में 3 कैथ लैब हैं और रोजाना 30 से अधिक एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी होती हैं। हादसे के कारण एक ही लैब में मरीज शिफ्ट करने पड़े। यहां भी इमरजेंसी मरीजों को ही इलाज दिया गया। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि बचे मरीजों के ऑपरेशन मंगलवार को हो सकेंगे।

Rs.50 लाख की मशीन खराब कर चुके हैं चूहे

मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में चूहे कोई न कोई नुकसान कर देते हैं। पिछले साल भी ट्रोमा सेंटर में 50 लाख रुपए की बायोकेमिस्ट्री मशीन के तार चूहे काट गए थे। 11 महीने बाद कंपनी ने मशीन ठीक करने के लाखाें रुपए लिए थे।

यूपीएस के तार चूहे ने काटे तो हादसा हुआ। मरीजों को शिफ्ट कर दिया था। प्लांड केस मंगलवार को करेंगे। -डॉ. एसएम शर्मा, एडिशनल प्रिंसीपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज।

सुलगते सवाल

1. फ्यूमीकेट किए बिना कैसे शुरू होगी लैब?

धुआं भरने के बाद कैथ लैब को फ्यूमीकेट किए बिना शुरू करना कहां तक सही होगा।

2. पेस्ट कंट्रोल क्यों नहीं होता?

चूहों के बार-बार नुकसान कने के बाद भी पेस्ट कंट्रोलिंग की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती।

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