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पुलिस आयुक्त : आरटीओ ने दी है हमें नीली बत्ती एसीएस परिवहन: नीली बत्ती बैन, गलत लगाई
केंद्र सरकार ने वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए चाहे लाल और नीली बत्ती का सिस्टम खत्म कर दिया हो, लेकिन जयपुर का पुलिस महकमा अब भी इसका मोह नहीं छोड़ पा रहा है। जिन पुलिस अफसरों पर बत्ती लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा है वो ही अपने वाहनों पर बत्तियां लगाए घूम रहे हैं। भास्कर ने 15 दिन तक शहर मे पड़ताल की तो बत्ती मोह में डूबे पुलिस के कई चेहरे नजर आए। यह मोह इतना गहरा है कि भास्कर कैमरामैन के फोटो खींचने पर बत्ती हटाने की जगह उलझ पड़े। सिविल लाइंस जैसे पॉश इलाके में नीली बत्ती लगी गाड़ी में तैनात पुलिसकर्मी तो करीब दो घंटे तक कैमरा तोड़ने और मुकदमा दर्ज करने जैसी धमकियां देेते रहे। काबिलेगौर है कि इसी पुलिस के पास नीली बत्ती लगे वाहनों पर कार्रवाई का जिम्मा है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि जो खुद अवैध रूप से बत्ती लगाए घूम रहे हैं वो दूसरे लोगों पर क्या कार्रवाई करेंगे?
एंबुलेंस, रेडक्रॉस वाहन पर ही बत्ती
सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्रालय ने एक साल पहले अधिसूचना जारी कर सभी राज्यों को वाहनों पर लगी लाल-नीली बत्ती हटाने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी कहा गया कि नीली बत्ती का उपयोग एम्बुलेंस, एवं रेडक्रास जैसे इमरजेंसी सेवाओं वाले वाहनों पर ही हो सकेगा। इसके बाद मंत्री, आईपीएस, आईएएस अफसरों के वाहनों से बत्ती हटा दी गई। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने यह निर्देश दिए थे कि कानून व्यवस्था संभालने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मल्टी कलर बत्ती लगा सकते हैं लेकिन जयपुर में पुलिस नीली बत्ती का प्रयोग कर रही है। परिवहन विभाग ने पुलिस को मल्टी कलर बत्ती आवंटित भी कर दी हैं लेकिन इनका प्रयोग सिर्फ पीसीआर वैन पर ही हो रहा है।
यूं सामने आई पुलिस की रंगबाजी
टोंक रोड एसएमएस स्टेडियम
सोमवार, 9 अप्रैल। मुख्यमंत्री निवास से 50 मीटर दूरी पर नीली बत्ती की पुलिस जीप खड़ी थी। भास्कर ने फोटो खींचा। तीन पुलिसकर्मी उतर कर कैमरामैन से उलझ पड़े। कहा- फोटो डिलीट करो, नहीं तो केस दर्ज कर देंगे।
नौकरी से हटाने का प्रावधान
अवैध रूप से लाल या नीली बत्ती का उपयोग करने पर मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 177 के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों विरुद्ध सीसीए नियम 17/16 के अन्तर्गत कार्रवाई होती है। जांच कमेटी बनती है। आरोप साबित होने पर पदोन्नति व वेतन वृद्धि रोकने और 16 सीसीए में सेवामुक्त करने का प्रावधान है। 100 से 300 रुपए तक का जुर्माना भी किया जा सकता है।
पुलिस आयुक्त : आरटीओ ने दी है हमें नीली बत्ती
एसीएस परिवहन: नीली बत्ती बैन, गलत लगाई
ज्योति नगर थाना
हमें परिवहन विभाग ने इमरजेंसी के लिए नीली बत्ती उपलब्ध कराई हैं। परिवहन विभाग के सर्कुलर के आधार पर ही नीली बत्ती का प्रयोग किया जा रहा है। -संजय अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर, जयपुर
केंद्र की अधिसूचना के तहत पुलिस को हमने मल्टीकलर बत्ती उपलब्ध कराई है। नीली बत्ती लगाने का किसी को भी अधिकार नहीं है। फिर भी कोई इसका उपयोग कर रहा है तो वह नियम विरुद्ध है। -शैलेंद्र कुमार अग्रवाल, एसीएस परिवहन विभाग
िसविल लाइंस
बजाज नगर
फोटो : अनिल शर्मा