अब पोस्टमार्टम-मेडिको लीगल रिपोर्ट बदली नहीं जा सकेगी, ऑनलाइन होगी
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बनने वाली मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) व पोस्टमार्टम रिपोर्ट (पीएमआर) मैन्युअल के बजाय कम्प्यूटराइज्ड एवं ऑनलाइन बनने लगेगी। वर्तमान में यह रिपोर्टें पोस्टमार्टम एवं एमएलआर हाथ से लिखी जा रही है, जिससे न केवल उसके तथ्यों से छेड़छाड़ की संभावना रहती है बल्कि, पढ़ने में भी बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऑनलाइन में ऐसी कोई संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। क्योंकि, एक बार जो रिपोर्ट बना दी वह बदली नहीं जा सकेगी। अगर इसमें किसी तरह की कोई कारस्तानी की गई तो पकड़े जाएंगे। हरियाणा की तर्ज पर प्रदेश में इसकी कवायद शुरू की जा रही है। गृह विभाग ने एनआईसी को वेब-सॉफ्टवेयर बनाने का जिम्मा सौंपा है। संयुक्त सचिव ने इसके निर्माण में आने वाले खर्च के लिए पुलिस कल्याण कोष से 35 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। गृह विभाग का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे एसएमएस अस्पताल सहित जयपुर के विभिन्न अस्पतालों में लागू किया जाएगा। फिर नतीजों के अनुसार इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
विधि विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमआर, एमएलआर एवं एफएसएल रिपोर्ट हाथ से लिखी जा रही है। हाथ से लिखी रिपोर्ट को पढ़ने में बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। का एक-एक शब्द का अपना महत्व होता है। अदालतों में मामलों की सुनवाई और फिर कोर्ट के निर्णय में बहुत अहम होता है। एक शब्द के मायने गलत निकलने पर पूरा मुकदमा ही बदल जाता है। कंप्यूटराइजेशन से ऐसी स्थिति नहीं बनेगी। एक बार रिपोर्ट बनने के बाद उसमें बदलाव नहीं किया जा सकेगा। गौरतलब है कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में यह रिपोर्टें वर्तमान में हाथ ही लिखी जा रही हैं।
हरियाणा से एडवांस्ड होगा सॉफ्टवेयर
दरअसल, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बनने वाली मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) व पोस्टमार्टम रिपोर्ट (पीएमआर) कम्प्यूटराइज्ड नहीं है। हरियाणा में हस्तलिखित पीएमआर-एमएलआर को ऑनलाइन कर प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार हरियाणा से ज्यादा एडवांस्ड वेब-सॉफ्टवेयर बनाने का जिम्मा एनआईसी को दिया है। ताकि, सीसीटीएनएस के माध्यम से यह रिपोर्ट सीधे अनुसंधान अधिकारी के पास पहुंच जाएगी। संबंधित केस के तमाम दस्तावेज एक ही जगह रहेंगे।
रिपोर्ट ऑनलाइन होने से होंगे चार बड़े फायदे
समय की बचत होगी
पोस्टमार्टम या एमएलसी रिपोर्ट तत्काल ऑनलाइन पुलिस को मिल जाएगी। पुलिस को अस्पतालों में चक्कर लगाने से निजात मिलेगी। कोर्ट में आना-कानी नहीं कर सकेंगे।
पारदर्शिता बनी रहेगी
पोस्टमार्टम के तत्काल बाद रिपोर्ट समिट करनी होगी। फिर इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। पीएमआर एवं एमएलआर का समय एवं रिपोर्ट का समय इंद्राज रहेगा।
गफलत नहीं होगी
हाथ से लिखी पीएमआर एवं एमएलआर में शब्दों को लेकर कई बार गफलत हो जाती है। केसों की प्रकृति बदल जाती है। कंप्युटराइज्ड रिपोर्ट में ऐसी संभावना नहीं रहेगी।
आरोपों से निजात मिलेगी
वर्तमान में सरकार या पुलिस पर रिपोर्ट प्रभावित करने या छेड़छाड़ के आरोप लगते हैं। अब ऐसी संभावनाएं भी नहीं रहेंगी। कम से कम एक बार रिपोर्ट बनने के बाद बदलाव असंभव।