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गोल्यावास में जमीन पर जिनके समय कब्जे हुए, जेडीसी ने उस उपायुक्त सहित 5 के जोन बदले

3 वर्ष पहले
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दो सप्ताह से आरएएस अफसरों की तबादला सूची के इंतजार में जेडीए के जोन उपायुक्तों के क्षेत्राधिकार बदलने की जो कवायद टलती आ रही थी, उसको जेडीसी वैभव गालरिया ने मंगलवार को जारी करा दिया। जिन पांच आरएएस अफसरों के जोन बदले गए, उनमें पृथ्वीराज नगर की उपायुक्त एकता काबरा को जोन से हटाकर मुख्यालय में प्रशासन व जांच में लगाया है। दरअसल इन्हीं के जोन में गोल्यावास की 104 बीघा जमीन पर अवैध निर्माण का मामला शहरभर में चर्चित रहा। हालांकि जेडीए की ओर से मामले की जांच कराकर सभी जिम्मेदारों पर कार्रवाई टाली जा रही है। जिस ईओ को पूरे मामले में अवैध निर्माण नहीं तोड़ पाने का दोषी मानते हुए नोटिस दिया था, अभी तक उसका जवाब भी नहीं लिया जा सका है। जबकि इस अवैध निर्माण को लेकर जेडीए की साख पर बनी हुई है। बदलाव की सूची में इनके अलावा जोन 11 के उपायुक्त सुरेंद्र सिंह यादव को जोन-2 में और जोन-8 के प्रवीण कुमार अग्रवाल को पीआरएन उत्तर में लगाया गया है। दोनों की कमजोर परफार्मेंस जेडीसी को खटक रही थी। साथ ही भागीरथ हावा को रिटायरमेंट से कुछ समय पहले पीआरएन से जोन-11 में लगाया है तो ओमप्रभा को मुख्यालय से पीआरएन दक्षिण की जिम्मेदारी दी है।

समझौते के लिए जेडीसी से मिलने पहुंचे, लिखित में मांगा तो जवाब नहीं

जेडीए ने गोल्यावास की 104 बीघा जमीन पर हुए निर्माण को अवैध मान तोड़ने का जो मानस बनाया हुआ है, उसकी ट्रिब्युनल में बुधवार को सुनवाई है। हालांकि अबकी बार फिर तारीख मिलना तय है। इस बीच संबंधित लोग जेडीसी से मदद के लिए मिलने पहुंचे। जहां से जेडीसी ने उनको अतिरिक्त आयुक्त ओमप्रकाश बुनकर के पास भी भेजा। संबंधित की ओर से अब 25% विकसित भूमि की मांग की जा रही है। एक बार फिर जेडीए ने संबंधित रजिस्ट्रीधारकों आदि से लिखित में प्रस्ताव मांगा, लेकिन करीब सप्ताहभर में यह नहीं मिल पाया है। जेडीए का कहना है कि जिस दिन अवाप्ति हुई, उस दिन के खातेदार और चेन ऑफ डॉक्यूमेंट के आधार पर इस प्रस्ताव पर विचार हो सकता है। इसके लिए संबंधित 10 खातेदारों की सहमति के साथ ही केसेज वापस लेने होंगे। हालांकि अब 1998 के आसपास जमीन एक्वायर होने से लेकर 2014 में हुई रजिस्ट्री की वैधता, मुआवजे तक के कानूनी मसलों के नियमों की छानबीन की जरूरत है। जेडीसी ने कहा कि जब तक लिखित में कुछ प्रस्ताव आता है तो निर्णय लेंगे। जेडीए ट्रिब्यूनल में स्टे खारिज कराने की अर्जी लगा चुका।

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