जयकारों के बीच हुआ प्राचीन और अतिशयकारी प्रतिमाओं का अभिषेक
सोशल रिपोर्टर. जयपुर । नवीन मंदिरों के निर्माण से ज्यादा प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाने पर ज्यादा पुण्य मिलता है। ये उद्गार आचार्य चैत्य सागर महाराज ने आमेर स्थित दिगंबर जैन मंदिर नेमिनाथ जी (सांवला जी) में धर्मसभा में कहे।
इससे पूर्व वेदी में विराजमान मूलनायक भगवान नेमिनाथ के सुबह नित्यमह अभिषेक व शांतिधारा की गई। आचार्य के सान्निध्य में मंदिर के तलघर में विराजित प्राचीन प्रतिमाएं व यंत्र श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बाहर निकाले गए। प्रथम प्रतिमा भगवान पाश्र्वनाथ की निकाली गई। इसका पुण्यार्जन डीमापुर निवासी कमल कुमार नवनीत पांडया को मिला। द्वितीय प्रतिमा भगवान नेमिनाथ की निकाली गई। इसका पुण्यार्जन कुणाल कुमार कुशाग्र बजाज को मिला। तृतीय प्रतिमा निकालने का पुण्यार्जन आकाश टोंग्या कोलकाता को मिला। इसके बाद प्राचीन प्रतिमाओं को बाहर निकालने का सिलसिला चल पड़ा। तलघर से 100 से अधिक प्रतिमाएं, सैकड़ों की संख्या में 25 तरह के संवत 1651 के प्राचीन यंत्रों को बाहर निकाला गया। प्रतिमाओं का पंचामृत अभिषेक किए गए। स्वर्ण कलश से अशोक काला ने, रजत कलश से विवेक काला ने, आमरस सेे सुधांशु कासलीवाल तथा महेंद्र कुमार पाटनी ने अभिषेक किए। इसके बाद सकड़ों भक्तों ने प्राचीन प्रतिमाओं के दुर्लभ दर्शन किए।
जयपुर। आमेर स्थित दिगंबर जैन मंदिर नेमिनाथ जी (सांवला जी)मंदिर के तलघर में विराजित प्राचीन प्रतिमाएं व यंत्र श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बाहर निकालते आचार्य चैत्य सागर महाराज।