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पहले मंदिर माफी की जमीनों की सूची बनेगी फिर नीति बनाकर हटाएंगे कब्जे

3 वर्ष पहले
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सरकार के लिए मंदिर माफी की जमीनों पर हुए कब्जे नासूर बनते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के मंदिर माफी की जमीनों को लेकर आदेश आ चुके हैं। लेकिन हजारों की संख्या में मंदिर माफी की जमीनों पर कब्जे हो जाने से अब उनके खाली करवाने की नीति बनाने का सरकार पर दबाव है। कई मंदिर प्रतिनिधियों और महंतों के ज्ञापनों के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा दिए निर्देशों की पालना में यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने मंगलवार को मंदिर माफी प्रकरण को लेकर बैठक की। कृपलानी ने मंदिर माफी पर कब्जे वाले प्रकरणों और जमीनों की रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए। पिछले दो साल में भाजपा के जन सुनवाई कार्यक्रम से लेकर देवस्थान मंत्री को मिली मंदिर माफी की जमीन पर कब्जे की शिकायतों के बाद अब सरकार नई नीति बनाकर कार्रवाई के मूड में है। इसको लेकर दोपहर से शुरू हुई बैठक देर रात तक चलती रही।

देवस्थान विभाग ने पिछले साल आदेश दिए थे कि राजस्थान में मंदिरों के लिए आवंटित जमीनों पर कब्जा करने के मामलों में सरकार ने अब ऐसी जमीनों की लिस्ट बनाएगी। लेकिन अभी तक ऐसी जमीनों की पूरी लिस्ट नहीं बनी है। दूसरी तरफ मंदिर माफी की जमीन के मामलों में सरकार को कोर्ट में जवाब पेश करना था, जिसमें भी कोई ठोस एक्शन प्लान पेश नहीं किया गया। लिहाजा प्रदेश में मंदिर माफी की जमीनें खाली नहीं होने से मंदिर ट्रस्टों से जुड़े लोगों का गुस्सा सरकार के प्रति बढ़ता गया। नगरीय विकास ने पहले मंदिर माफी की जमीनों पर बसी कॉलोनियों के नियमन की गली निकालने की कवायद शुरू कर दी थी। इससे भी लोगों में गुस्सा है। मंत्री ने अब तक की तीन बार का वार्ता में आए सुझावों के बाद पूर्व में महाधिवक्ता की ली गई राय के संबंध में भी चर्चा की। अब सरकार मंदिर माफी की जमीनों की पूरी रिपोर्ट तैयार कर नई नीति और एक्शन प्लान तैयार करने के मूड में है।

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