16 साल बाद लीलाधर अपहरण कांड का भी पर्दाफाश करेगी एसओजी
एसओजी का शक आरोपियों ने लीलाधर की भी हत्या करने के बाद उसके शव को खुर्दबुर्द कर दिया, एसओजी आरोपी हरवीर सहारण से कर रही है पूछताछ
क्राइम रिपोर्टर|जयपुर
चुनावी रंजिश के चलते अपने साथी की हत्या करने वाले रावतसर नगर पालिका चेयरमैन के पति की गिरफ्तारी के बाद एसओजी के अधिकारियों ने 16 साल पुराने एक और अपहरण कांड का भी पर्दाफाश करने की तैयारी कर ली है। दरअसल रावतसर निवासी लीलाधर सोनी भी मई 2002 में घर से अचानक लापता हो गया था। इस संबंध में दिसंबर 2002 में लीलाधर के परिजनों ने हरवीर सहारण और उसके पिता पर अपहरण करने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि पुलिस ने मार्च 2003 में इस प्रकरण में एफआर लगाकर फाइल को बंद कर दिया था। एफआर कोर्ट में स्वीकृत हो गई थी। नवंबर 2016 में सरदार शहर थाना प्रभारी ओमप्रकाश गोदारा ने लूट के आरोप में वजीर खान को गिरफ्तार किया तो उसने वर्ष 2001 में लापता हुए प्रेम काली रावण की हत्या होने और वर्ष 2002 में लीलाधर सोनी का अपहरण होने के जानकारी पूछताछ में बताई। इसके बाद पुलिस ने पत्राचार करके दोनों मामलो को रिओपन किया था। लीलाधर अपहरण कांड की फाइल 13 साल बाद रिओपन हुई थी। तब से फाइल रावतसर थाने में ही पड़ी थी। सोमवार को एसओजी ने आरोपी हरवीर सहारण व भीम बेनीवाल प्रेम काली रावण की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अब एसओजी के अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों ने लीलाधर की भी हत्या की थी और उसके शव को खुर्दबुर्द कर दिया। इस संबंध में एसओजी को अधिकारियों को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे है। एसअोजी इस मामले में भी गिरफ्तार हो चुके आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
शव को जलाने वाली जगह का नक्शा-मौका तैयार, आरोपी 7 दिन के रिमांड पर
हनुमानगढ़ के रावतसर से 17 साल पहले अचानक लापता हुए प्रेम काली रावण की हत्या करने वाले नगर पालिका चेयरमैन के पति हरवीर साहरण उसके साथी भीम बेनीवाल को एसओजी ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। जहां से आरोपियों को सात दिन के रिमांड पर भेज दिया। इसके बाद आरोपियों को रावतसर लेकर गई और वहां पर आरोपियों के साथ शव को पहले दफनाने और फिर जलाने वाली जगह का मौका-नक्शा तैयार किया। गौरतलब है कि एसओजी ने 17 साल बाद प्रेम काली रावण की हत्या का सोमवार को खुलासा किया था। इससे पहले एसओजी इस मामले में तीन दफा एफआर लगा चुकी थी। चौथी बार मामला रिओपन हुआ तो सीएमओ से एसओजी को जांच करने के निर्देश दिए थे। आरोपी से एडिशनल एसपी करन शर्मा व पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने पूछताछ की तो 17 साल पुराने मामले में पांच मिनट के भीतर प्रेम काली रावण की हत्या करने की बात कबूल कर ली।
आरोपियों ने सबूत को कर दिया नष्ट
एसओजी के आईजी दिनेश एमएन ने बताया कि प्रेम काली रावण की हत्या करने के बाद सबूतों को नष्ट करने के लिए मृतक के शव को पहले खुद के खेत पर दफना दिया। जब उनको शव बाहर निकलने जाने का डर लगा तो उन्होंने वापस शव को बाहर निकाला और केरोसिन डालकर उसके आग लगा दी। इसके बाद आरोपियों ने राख और हड्डियों को नहर में डाल दिया। इसके बाद भी आरोपी कुछ माह तक डरते रहे और जहां पर शव जलाया था, वहां चाय डालकर आ गए।