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एक लाख शिक्षक...सर्वशिक्षा का 92% पैसा तो तनख्वाह में, योजनाओं के लिए सिर्फ 8% बजट

3 वर्ष पहले
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हाल ही केन्द्र सरकार को अपनी महत्वाकांक्षी योजना सर्वशिक्षा अभियान को माध्यमिक शिक्षा से जोड़ना पड़ा है। दरअसल, जिन उद्देश्यों को लेकर प्राथमिक स्कूलों में यह योजना शुरू की गई थी, यह उन्हें पूरे नहीं कर पा रही थी। सर्व शिक्षा अभियान के राजस्थान में खर्च हुए पिछले दस सालों के बजट को देखें तो सामने आता है कि इसका काम केवल शिक्षकों को वेतन देना था। बजट का 92 फीसदी हिस्सा तो उन शिक्षकों के वेतन पर खर्च हो रहा था। जिनको सरकार ने एसएसए के मद में नियुक्ति दे रखी है।

प्रदेश में करीब एक लाख शिक्षकों को एसएसए योजना से वेतन का भुगतान होता रहा है। एसएसए योजना के अंतर्गत वर्ष 2008-09 में राजस्थान में कुल बजट का करीब 60 फीसदी हिस्सा शिक्षकों के वेतन पर खर्च किया गया था। शेष 40 फीसदी बजट शिक्षा में सुधार की योजनाओं पर खर्च हो रहा था। इसके बाद से वेतन पर खर्च बढ़ता जा रहा था जो पिछले साल तक चौंकाने वाली स्थिति में पहुंच गया।

वर्ष 2017-18 के दिसंबर तक के बजट का आकलन किया जाए तो बजट का 92 फीसदी हिस्सा तो केवल वेतन पर ही खर्च हो रहा है। अन्य योजनाओं के लिए केवल 8 फीसदी बजट ही बच रहा था। अब केंद्र सरकार ने इस योजना को ही मर्ज कर दिया है। योजना को मर्ज करने के पीछे अधिकांश बजट वेतन पर खर्च होने को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 3 अप्रैल को एक आदेश जारी कर तीन योजनाओं सर्व शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और टीचर्स एजुकेशन को मर्ज कर दिया है। तीनों को मर्ज करने के बाद चलने वाली नई योजना पहले चरण में दो साल के लिए चलेगी।

रियलिटी

चैक

आखिर क्यों सर्वशिक्षा अभियान को माध्यमिक शिक्षा अभियान से जोड़ना पड़ा। किस तरह एक महत्वकांक्षी योजना ने पिछले दस सालाें में अपना अस्तित्व खो दिया। जानिए विशेष रिपोर्ट से-

दस साल पहले तक वेतन पर खर्च हो रहा था 60% बजट, 32% और बढ़ गया

इसलिए शुरू किया था सर्वशिक्षा अभियान

सर्वशिक्षा अभियान की शुरुआत 6 से 14 साल तक के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना और प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। वर्ष 2000-01 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा में बालक-बालिका एवं सामाजिक श्रेणी के अंतरों को दूर करने, नए स्कूल खोलने, स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा-कक्षों का निर्माण करने, पेयजल सुविधा प्रदान करने, अध्यापकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना प्रमुख था।

सर्वशिक्षा और माध्यमिक शिक्षा एक साथ होने से काम तेज होगा : देवनानी

सर्व शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा अभियान के समन्वय से प्रदेश में शैक्षिक उन्नयन के कार्य अधिक तेजी से क्रियान्वित हो सकेंगे। प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा अधिक गति से आगे बढे़गी। इससे राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणीं राज्यों में शुमार हो सकेगा। - वासुदेव देवनानी, शिक्षा राज्यमंत्री

जिस योजना का बजट बचेगा, वह दूसरे में इस्तेमाल हो सकेगा

एसएसए और आरएमएसए के बजट का एक दूसरे की योजना में उपयोग नहीं हो पा रहा था। योजनाओं को मिलाने से अब जो भी बजट आएगा। वह जरूरत के अनुसार खर्च किया जा सकेगा। इससे सरकारी स्कूलों में भौतिक और मूलभूत सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा। - विपिन प्रकाश शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ

वेतन पर यूं बढ़ता गया खर्च

वर्ष बजट खर्च (करोड़ों में) खर्च % में

2008 1629.37 992.54 60

2009 1986.20 1469.98 74

2010 2644.24 1836.96 69

2011 3047.69 2281.77 75

2012 3405.54 2746.10 81

2013 3641.00 3232.00 89

2014 4256.38 3669.05 86

2015 4256.35 3713.02 87

2016 4543.66 3942.90 87

2017 3660.79 3357.07 92

इन योजनाओं पर घटा खर्च

योजना का नाम 2008-09 2017-18

सिविल वर्क 262.44 10.22

स्कूलों की मरम्मत 41.22 5.03

टीचर्स ट्रेनिंग 20.60 17.34

दिव्यांग बच्चों के लिए 12.62 5.01

इनोवेशन 14.16 4.26

रिसर्च 9.17 0.79

स्पेशल ट्रेनिंग 13.69 .08

(रु करोड़ों में)

इन योजनाओं पर बढ़ा

योजना का नाम 2008-09 2017-18

किताबें वितरण 5.46 11.59

स्कूल ग्रांट 43.87 53.77

ट्रेनिंग लीडर 1.64 4.48

कंप्यूनिटी मोबेलाइजेशन 0.00 4.77

ट्रांसपोर्ट फेसेलिटी 0.00 0.17

(रु करोड़ों में)

इनोवेशन और रिसर्च में सर्वशिक्षा अभियान का पैसा तेजी से घटा है। इनोवेशन के लिए जहां सिर्फ चार करोड़ रु. मिल पा रहे हैं, वहीं रिसर्च में तो और स्थिति गिरती जा रही थी।

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