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7 साल में खान-पान के 158 मामले जांच में खतरनाक मिले, केवल 3 में बयान हो पाए, निर्णय सिर्फ एक में
सीएमएचओ की ओर से जुलाई 2013 में कमलेश गोयल नाम के व्यक्ति के मिलावटी मसालों का गोदाम सीज किया गया था। मुरलीपुरा, वीकेआई रोड नंबर एक पर कार्रवाई के दौरान संबंधित मौके पर नहीं आया। सैंपलिंग और उसके बाद री-टेस्टिंग की अपील भी दूसरे से करा दी। अभी तक गोदाम में सैकड़ों किलो माल सीज पड़ा हुआ है। मार्च 2014 के आसपास फूड इंस्पेक्टरों ने अनुसंधान करके फर्मों की डिटेल लेकर सीजेएम कोर्ट में केस लगा दिया था। लेकिन अभी तक अभियुक्त कोर्ट तक नहीं पहुंचा, मामला तलबी में चल रहा है। इस बीच परिसर मालिक ने उसकी किराए की जगह को खाली कराने के लिए न्यायालय में अप्लीकेशन लगाई, लेकिन क्योंकि अभियुक्त उपस्थित नहीं है तो कोर्ट से राहत नहीं मिली। इसी तरह मुरलीपुरा में ही रचना ट्रेडिंग कंपनी के अभियुक्त ओमप्रकाश गर्ग के मिलावटी मसाले भी 2013 में सीज किए गए थे। तब से वो फर्म बंद किए हुए हैं। पड़ताल में सामने आया कि 2011 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) एक्ट बनने के बाद से कहने को मिलावटखोरों पर सख्ती की बात कही गई, लेकिन हकीकत में एेसा नजर नहीं आता है। एक्ट के बाद से राजधानी में 889 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच में फेल आए हैं। इनमें से 158 मामले तो खतरनाक यानी अनसेफ स्तर के हैं। यानी मिलावट एेेसी, जिससे स्किन, दिल, दिमाग से जुड़ी खतरनाक बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं। ये वो मामले हैं, जिनको सीधे सीजेएम कोर्ट में लगाया गया। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के मुताबिक इनमें से केवल 3 मामलों में ही बयान हो पाए हैं। निस्तारण या निर्णय केवल दो दिन पहले एक मामले में हो पाया है।
फूड अनसेफ-सेफ्टी दिखावटी : मिलावटियों पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माने नहीं होने से डर नहीं
एक्ट के बाद सैंपल और केसेज की स्थित
साल सैंपल मिस-ब्रांड सब-स्टैं. अनसेफ
2011 88 0 9 2
2012 582 25 75 24
2013 502 44 63 34
2014 420 43 70 16
2015 633 70 112 41
2016 489 61 69 17
2017 459 26 64 24
हमारा काम सैंपल करके जांच रिपोर्ट के आधार पर केस लगाना है। इसके बाद तो हम क्या कर सकते हैं। -नरोत्तम शर्मा, सीएमएचओ
एक्ट के हिसाब से कार्रवाई करते हैं। इस मसले पर हम और बातचीत करके प्रभावी कार्रवाई की कोशिश करेंगे। -वीके माथुर, कमिश्नर फूड और पब्लिक हैल्थ डायरेक्टर
मिस-ब्रांड और सब-स्टैंडर्ड के 7 साल में 731 नमूने फेल... अधिकतम 5 लाख का जुर्माना कहीं नहीं, 150 पेंडिंग
फूड सेफ्टी एक्ट के तहत राजधानी में 7 साल में जो 3173 सैंपल लिए गए हैं। उनमें से 889 फेल हुए हैं। मिस-ब्रांड और सब-स्टैंडर्ड के मामलों में एडीएम के यहां जुर्माने का प्रावधान है, जो सब स्टैंडर्ड में अधिकतम 5 लाख और मिस-ब्रांड में 3 लाख है। अभी तक मिस-ब्रांड के 269, सब स्टैंडर्ड के 462 मामलों में महज 44 लाख के आसपास जुर्माना हो पाया है। केवल दो मामलों में 3 और 2 लाख के जुर्माने हुए हैं। जबकि विभाग के मुताबिक 150 से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं।