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आरपीएफ के आईजी और उनकी पत्नी गैर जमानती वारंट से तलब

3 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने आरपीएफ के आईजी पुष्य मित्र सिंह देव और उनकी प|ी अनिता सिंह देव की आपराधिक याचिका खारिज कर दी है। जिसमें उन्होंने सेशन कोर्ट के गैरजमानती वारंट को सम्मन में तब्दील करने की मांग की थी। यह वारंट जारी मनी लाउंड्रिंग के मुकदमे में जारी हुआ। ईडी ने यह केस 57.76 लाख रुपए की आय से अधिक संपत्ति मिलने के मामले में किया है। पुष्य मित्र के कई रिश्तेदार ब्यूरोक्रेसी में अहम पदों पर हैं।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट के विशेष न्यायालय में जज नरेन्द्र कुमार शर्मा ने आईजी और उनकी प|ी के खिलाफ 13 मार्च को प्रसंज्ञान लिया। साथ ही गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। जिसके खिलाफ सिंहदेव दंपत्ति ने हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका लगाई। जिसमें गैर जमानती वारंट की जगह सम्मन जारी किए जाने की मांग की गई। भारत सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया राजदीपक रस्तोगी ने पैरवी करी। उन्होंने दलील दी कि वर्तमान स्तर पर आपराधिक याचिका नहीं सुनी जा सकती। जस्टिस दीपक माहेश्वरी ने सिंहदेव दंपत्ति की याचिका खारिज कर दी। रस्तोगी के अनुसार गैर जमानती वारंट के चलते अब आरोपियों को कोर्ट में आत्म समर्पण करना होगा, अन्यथा पुलिस को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करना होगा।

सिंहदेव ने 1985 में आरपीएफ की नौकरी ज्वाइन की। इलाहबाद में तैनाती के दौरान उनके घर सीबीआई ने अक्टूबर 2009 में छापे डाले थे। जांच में सामने आया कि इस सेवा काल में उन्होंने 2.31 करोड़ रुपए की सम्पत्ति बनाई। 16.49 लाख रुपए खर्चा किया। ऐसे में कुल रकम 2.48 करोड़ रुपए बैठती है। इसके विपरीत इस अवधि में उनकी कमाई 1.53 करोड़ रुपए थी। इस हिसाब से 1.03 करोड़ रुपए का वे हिसाब नहीं दे सके। ईडी ने पीएमएलए के तहत 1996 से 2007 तक की अवधि की जांच की। जिसमें सिंहदेव दंपत्ति 57.76 लाख रुपए की संपत्ति का हिसाब नहीं दे सके। सीबीआई भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार्जशीट पेश कर चुकी है।

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