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लोक सेवा गारंटी का सच : सात साल में छह करोड़ शिकायतें, अफसरों पर जुर्माना केवल 23 हजार रु.
प्रदेश में लोगों को विभिन्न कार्यालयों में सरकारी सेवा समय पर उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2011 में राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया गया था, लेकिन पिछले सात सालों में अफसरों ने इस कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। इन सात सालों में समय पर काम नहीं होने की 5.81 करोड़ शिकायतें सरकार के पास पहुंचीं। इनमें से अभी भी 1.33 लाख शिकायतें पेंडिंग बताई जा रही हैं। शिकायतों के मामलों में टॉप थ्री जिले जयपुर, जोधपुर और भीलवाड़ा हैं। राजस्थान लोक सेवा प्रदान करने की गारंटी अधिनियम में काम करने की तय है। अवधि तय इसलिए की गई थी ताकि भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं मिले और अधिकारी तय समय में काम पूरा करें, क्योंकि तय समय में काम नहीं होने पर अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया था। हैरानी वाली बात यह है कि समय पर काम नहीं होने की शिकायतों की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद महज 23 हजार रुपए का जुर्माना अफसरों पर लगाया गया। कांग्रेस शासन में 14 नवंबर, 2011 को राजस्थान लोक सेवा प्रदान करने की गारंटी अधिनियम-2011 को लागू किया गया था। सरकार ने 25 विभागों की 221 सेवाओं को इस कानून के दायरे में शामिल किया है। राजस्थान में 30 नवंबर, 2017 तक अधिनियम की पालना नहीं होने की 5,81,34,865 शिकायतें जन अभियोग निराकरण विभाग में दर्ज हुई। विभाग का दावा है कि इनमें से 5,80,01,180 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। वर्तमान में केवल 1,33,685 शिकायतें ही लंबित हैं। प्रशासनिक सुधार विभाग के एसीएस पवन गोयल और जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष श्रीकृष्ण पाटीदार से इस प्रकार अधिक संख्या में आ रही शिकायतों को लेकर बात करने का प्रयास किया, लेकिन दोनों से ही बात नहीं हो सकी।
रियलिटी चैक
सरकारी विभागों में नागरिकों के काम निश्चित समय सीमा में कराने के लिए वर्ष 2011 में लाया गया था अधिनियम, इसी पर भास्कर की खास पड़ताल
सबसे ज्यादा शिकायतें जयपुर, जोधपुर व भीलवाड़ा से मिलीं
5.81
इसमें... भीलवाड़ा में 1,000 रुपए, बीकानेर में 5,500 रुपए, नागौर में 1,500 रुपए और उदयपुर में 15,500 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
सबसे अधिक फेल जिले
जिला कुल शिकायतें पेंडिंग मामले
जयपुर 7951542 15479
जोधपुर 4377780 3976
भीलवाड़ा 2918716 3843
सीकर 2865699 1397
उदयपुर 2787919 9596
अजमेर 2689474 1595
अलवर 2279113 2165
नागौर 2219919 3356
कोटा 2207243 2963
झुंझुनूं 2074928 1000
जयपुर सहित 10 जिले ऐसे, जहां जनसंख्या से अधिक शिकायतें
जयपुर सहित दस जिले ऐसे हैं जहां से पिछले सात साल में उनकी जनसंख्या से भी अधिक शिकायतें आई हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जयपुर जिले की जनसंख्या 6626178 थी। इन सात सालों में जयपुर जिले में इस अधिनियम की पालना नहीं होने की शिकायतों की संख्या जनसंख्या से कहीं अधिक 7951542 है। इसके अलावा अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, जोधपुर, नागौर, सीकर और टोंक जिले ऐसे हैं जहां जनसंख्या से भी अधिक शिकायतें पहुंची हैं।
करोड़ शिकायतें पहुंची हैं अधिनियम का पालन नहीं होने की जन अभियोग निराकरण विभाग के पास।
स्त्रोत : आरटीआई से प्राप्त जनअभाव निराकरण विभाग के आंकड़े।
यहां 10 लाख से कम शिकायतें
जिला शिकायतें पेडिंग
बूंदी 993385 679
दौसा 953512 149
धौलपुर 952443 139
सिरोही 936091 156
राजसमंद 890255 1105
सवाईमाधोपुर 875485 4207
बारां 865270 510
जैसलमेर 652980 1596
डूंगरपुर 595507 435
करौली 471120 126
23,500
रुपए का ही जुर्माना लगाया गया है अधिकारियों पर सात साल में।
सात साल में करीब 6 करोड़ शिकायतें आना गंभीर मामला है। सरकार को इस बात की जांच करनी चाहिए कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें क्यों पहुंची हैं। जो अधिकारी समय पर काम नहीं कर रहे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। अधिकारी जरूरी कागजात पेश करने के बाद भी लोगों को काम के लिए चक्कर कटवाते हैं। इससे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की बू आने लगती है। -संदीप कलवानिया, एडवोकेट, राजस्थान हाईकोर्ट
कर्मचारी न तो सीट पर मिलते हैं और ना ही समय पर काम होते हैं। शिक्षकों की ही वेतन विसंगति, एसीपी, योग्यता जुड़वाने के काम लंबित पड़े रहते हैं और संबंधित कर्मचारी ध्यान तक नहीं देते। कई बार चक्कर कटवाने के बाद काम होते हैं। यही हाल सभी विभागों का है। इसी कारण लगातार शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है। - रामकृष्ण अग्रवाल, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु)