रमजानुल मुबारक हजारों बरकतों और रहमतों को अपने दामन में लिए है और बा बरकत महीना ईमान और तकवे का महीना है। हर मोमिन बंदा अपनी-अपनी हिम्मत और हैसियत के मुताबिक इसकी बरकतों से लुत्फ अंदाेज होता है। जिस शख्स के दिल में ईमान की जरा सी रमक व चमक हो, इस माह में उसकी ईमानी सलाहियतें उभरकर सामने आ जाती हैं। खुदा ने इसे अपना महीना बताया है। - मुफ्ती मुहम्मद जाकिर, मुफ्ती शहर जयपुर
लफ्ज रमजान की अजमत- लफ्ज रमजान में पांच हुरुफ हैं, “र’ अल्लाह तआला की रजा से है, “मीम’ अल्लाह की मुहब्बत से है, “ज़्वाद’ अल्लाह की जमानत से है, “अलिफ’ अल्लाह की उल्फत से है और “नून’ अल्लाह के नूर लिया गया है। इस तरह यह महीना नेक लोगों के लिए अल्लाह की रजा, मुहब्बत, जमानत, उल्फत, नूर, बख्शीश और बुजुर्गी का महीना है। - मुफ्ती अब्दुल सत्तार साहब, मुफ्ती शहर अहले सुन्नत
माहे रमजान अल्लाह तआला का बेहतरीन इनाम है, इस महीने में पूरे खुशू व खुजू के साथ इबादत करनी चाहिए। क्योंकि माहे रमजान में नेकियों के दर्जे बढ़ा दिए जाते हैं। रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपनी बुराइयों पर काबू रखना जरूरी है। इस महीने में शैतान कैद कर दिया जाता है, कब्रों से अजाब उठा लिया जाता है। रोजा अल्लाह व उसके बंदे के बीच का मामला है। - खालिद उस्मानी, चीफ काजी, राजस्थान