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अन्य राज्यों में बाहरी पर पाबंदी, फिर हमारे यहां दूसरे प्रदेश के अभ्यर्थी 50% कोटे में शामिल क्यों?
राज्य सरकार ने पिछले एक महीने में भर्तियों का अंबार लगा दिया है। चुनावी साल में आए दिन किसी न किसी विभाग में भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस सबके बीच इन भर्तियों में स्थानीय और बाहरी अभ्यर्थियों का मुद्दा भी गरमा गया है। कारण है, अन्य राज्यों में होने वाली भर्तियों में तो बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए तमाम तरह की पाबंदियां लगाकर स्थानीय बेरोजगार को वरीयता दी जाती है, जबकि राजस्थान में होने वाले भर्तियों में बाहरी राज्य के अभ्यर्थियों को खुली छूट मिल रही है। यहां तक कि उन्हें 50 प्रतिशत के सामान्य कोटे में शामिल होने का हकदार बना दिया है। साथ ही उम्र की भी वही छूट दी गई है, जो प्रदेश के अभ्यर्थियों को मिल रही है।
इसके विपरीत अन्य राज्यों में राजस्थान या अन्य बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को ऐसी खुली छूटी नहीं है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना सहित अन्य कई राज्यों में होने वाली भर्तियों में केवल स्थानीय को ही शामिल किया जाता है। इस कारण हमारे यहां के अभ्यर्थी वहां आवेदन ही नहीं कर पाते। साथ ही वहां कुछ भर्तियां ऐसी हैं जिनमें बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी आवेदन तो कर सकते हैं, लेकिन उन पर आयु की पाबंदी लगा दी जाती है। ऐसे में राजस्थान के बेरोजगारों ने सरकार के सामने सवाल उठाया है कि जब दूसरे राज्य स्थानीय अभ्यर्थियों को वरीयता दे रहे हैं, तो हमारे यहां बाहरी राज्यों के बेरोजगारों को नौकरी की ऐसी खुली छूट क्यों? स्थानीय बेरोजगारों को अवसर देने के लिए बाहरी राज्यों के समान पॉलिसी बनाने के लिए शुक्रवार को कार्मिक विभाग में बेरोजगारों ने अपना प्रेजेंटेशन दिया। अब इस प्रेजेंटेशन को सरकार के पास भेजा जाएगा।
बिग इश्यू
चुनावी साल में बम्पर भर्तियों के निकलने के साथ ही गहराया बाहरी और स्थानीय अभ्यर्थियों का मुद्दा... राजस्थान के बेरोजगारों ने सरकार के सामने उठाया सवाल-
राजस्थान में यह है स्थिति
राजस्थान में बाहरी राज्य के अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के कोटे में शामिल किए जाते हैं। उन्हें आयु सीमा या अन्य वही लाभ प्राप्त होते हैं जो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को मिलते हैं। इस कारण हमारे बेरोजगारों का हक मार रहे हैं।
यह हैं अन्य प्रदेशों में बाहरी अभ्यर्थियों के लिए प्रावधान
मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने 12 मई, 2017 को आदेश जारी कर भर्तियों में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों की आयुसीमा 18 से 25 साल तय कर रखी है। बाहरी राज्यों को आयु सीमा में छूट का लाभ भी नहीं दिया जाता।
मध्यप्रदेश में अक्टूबर 2017 में हुई पटवारी भर्ती में स्थानीय निवासी होना अनिवार्य था।
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ की भर्ती में आवेदन के लिए एमपी रोजगार कार्यालय में पंजीयन होना अनिवार्य था।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी में 6 अप्रैल, 2018 को असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती में केवल छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों को ही योग्य माना।
सिक्किम पब्लिक सर्विस कमीशन की 22 मार्च, 2018 को निकली असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती (सिविल) में केवल स्थानीय अभ्यर्थियों को ही आवेदन की छूट।
तेलंगाना पब्लिक सर्विस कमीशन की दिसंबर 2017 में निकली अलग-अलग कैटेगरी में असिस्टेंट इंजीनियरिंग भर्ती में स्थानीय निवासी को ही आवेदन की छूट।
कई बाहरी राज्यों में स्नातक सहित अन्य परीक्षाओं में अच्छे अंक दिए जाते हैं। इससे वे उन परीक्षाओं में हमारे यहां के अभ्यर्थियों से बाजी मार लेते हैं, जिनमें स्नातक, बारहवीं और दसवीं के अंकों के आधार पर चयन होता है। चूंकि वे सामान्य वर्ग के 50 फीसदी कोटे में शामिल होते हैं। इसलिए उनके पास चयन के लिए पर्याप्त सीटें रहती हैं। साथ ही आयु सीमा में भी वे सामान्य वर्ग की भांति 40 साल की उम्र का लाभ लेते हैं। इसलिए इंजीनियरिंग, शिक्षक भर्ती, पटवारी भर्ती और पुलिस भर्ती में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन होता है।
यह हो रहा है नुकसान
बेरोजगार महासंघ की मांग
बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा 25 साल की जाए। साथ ही उनके लिए अलग से 5% या इससे कम कोटा तय किया जाए।
हमारे यहां के बेरोजगारों को दूसरे राज्यों में नौकरी पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन यहां दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए कोई नियम कायदे नहीं बने। इसका वे पूरा फायदा उठाते हैं और हमारे यहां के बेरोजगारों का हक मार रहे हैं। सरकार को इस मामले पर अन्य राज्यों की भांति कोई पॉलिसी बनानी चाहिए। हमने इस मामले पर अपना प्रेजेंटेशन दे दिया है। - उपेन यादव, प्रदेशाध्यक्ष राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ
बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी यहां के बेरोजगारों का हक मार रहे हैं। तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में लेवल सेकंड में स्नातक का वेटेज 30 फीसदी है। इसका फायदा बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी उठा रहे हैं। क्योंकि वहां स्नातक तक बहुत अच्छे अंक दिए जाते हैं। इसलिए सरकार को इस मामले पर अब गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। - कमला लांबा, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान महिला शिक्षक संघ