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पार्क मनोरंजन के लिए, इनमें कोई भी निर्माण अतिक्रमण

4 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने पार्क में योगा सेंटर के निर्माण की मंजूरी देने से इंकार करते हुए कहा है कि पार्क घूमने व मनोरंजन की जगह है और इनमें किसी भी तरह का स्थाई व अस्थाई निर्माण अतिक्रमण माना जाए। अदालत ने कहा कि जेडीए व नगर निगम सुनिश्चित करें कि पार्कों में किसी भी का निर्माण नहीं हो और इन्हें सुरक्षित कर इनमें सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इनमें केवल फाउंटेन, ग्रेवल सैंड, बेंच, वॉक वे व बच्चों की फिसलपट्टी ही लगा सकते हैं। न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने यह आदेश अजमेर रोड स्थित मोदी नगर कल्याण एवं विकास समिति की याचिका का निपटारा और मोदी नगर विकास समिति के प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि पार्कों में पुरुष व महिलाओं के लिए शौचालय बनाए जाएं और अव्यवस्थाओं को दूर किया जाए और इसके लिए जयपुर नगर निगम व उद्यान अधीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाए। यदि योगा सेंटर बनाने के लिए मंजूरी की बात है तो इसके लिए अलग से योजना बनाई जाए। मामले के अनुसार, मोदी नगर कल्याण एवं विकास समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कॉलोनी के पार्क में पीडब्ल्यूडी योगा सेंटर बनाने के लिए शेड्स लगा रही है। वहीं दूसरी ओर मोदी नगर विकास समिति ने प्रार्थना पत्र याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मंत्री फंड से योग सेंटर बनाया जाएगा। योगा सेंटर का उपयोग कॉलोनी के सभी लोग करेंगे इसलिए इसे बनाने दिया जाए। अदालत ने कहा कि योगा सेंटर के लिए जेडीए अलग से योजना बनाए और पार्क में किसी भी तरह के निर्माण की मंजूरी नहीं दी जा सकती।

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