जेडीसी ने जोन उपायुक्त से 104 बीघा जमीन की रिपोर्ट मांगी
पृथ्वीराज नगर के गोल्यावास में 104 बीघा जमीन के अवाप्ति के दावों के बीच कैंप और अवैध निर्माण को लेकर निकाले गए आदेशों की पालना कराने में फेल रहा जेडीए अब पूरी तरह कटघरे में है। जो अधिकारी अभी तक अवैध निर्माण बताकर उन पर कार्रवाई की बात कहते आ रहे थे, वो अब खुद के ही चक्रव्यूह में फंसते नजर आ रहे हैं। जोन उपायुक्त से लेकर चीफ एनफोर्समेंट ऑफिसर मामले पर किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए जेडीसी वैभव गालरिया के छुट्टी से लौटने का इंतजार कर रहे थे। गुरुवार को जेडीसी लौटे तो उन्होंने इस संबंध में उपायुक्त एकता काबरा, अतिरिक्त आयुक्त प्रशासन ओमप्रकाश बुनकर आदि को फाइल लेकर बुलाया। शुक्रवार को जेडीसी ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की और खासकर कोर्ट केसेज से जुड़ी जानकारी उपायुक्त से मांगी है। साथ ही जमीन को लेकर अभी तक चली सारी प्रक्रिया के बारे में अवगत कराने को कहा है, ताकि इस बारे में न्यायोचित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि अवैध निर्माण आगे नहीं बढ़े, इस बारे में पहले ही निर्देश दिए जा चुके। अब जो निर्माण हुए हैं, जेडीए उनके बारे में भी फैसला करेगा। साथ ही विवादों का निपटारा कर बेशकीमती जमीन के बारे में फैसला साफ करेगा।
अभी तक जिस स्टे के दौरान निर्माण हुए और उसकी आड़ बताकर कार्रवाई टाली गई, जेडीए के पास उन्हीं की पूरी डिटेल नहीं है। मौके पर एडीजे और रेवेन्यू कोर्ट में 4 मामले बताए जा रहे हैं, लेकिन इनमें जेडीए की भूमिका साफ नहीं है। न ही स्थिति को साफ करने के लिए जेडीए ने कभी कोई गंभीरता दिखाई। बल्कि इसे अवैध निर्माण कराने और विशेष परिस्थितियों में रोकने का जरिया बनाया। इस बीच संबंधित जोन ने मामले की फाइल एनफोर्समेंट को भेजी, जिसे संबंधित ईओ ने अपने अधिकारियों से बात करके वापस जोन को लौटा दिया है। फाइल संबंधित जमीन पर जो स्टे बताए गए हैं, उनकी स्पष्ट डिटेल नहीं है। एनफोर्समेंट अधिकारी रघुवीर सिंह भाटी ने कहा कि मामले की जो फाइल आई है, उसमें हमने स्टे से संबंधित डिटेल मांगी है।
एनफोर्समेंट अधिकारी ने स्टे की झूठी और अधूरी जानकारी बताकर जेडीए मुख्यालय को लौटा दी फाइल
दोषियों को बेनकाब कर जनता को राहत दे जेडीए
जमीन के मालिकाना हक, खातेदारों के विवाद, प्लॉट धारी, निर्माण के पीछे के लोग और जमीन के भविष्य को लेकर जेडीए स्थिति साफ नहीं कर पा रहा। कैंप के लिए चारदीवारियां बनवाने के बाद मौके पर निर्माण किनके हैं? यह भी जेडीए को नहीं पता। कैंप की प्लानिंग फेल होने, उसके बाद मौके पर निर्माण के पीछे राजनैतिक रसूखात बताए जा रहे हैं, जिस पर अफसर अब बोलने से कतरा रहे हैं। उधर कुछ लोग मौके पर खुद के प्लॉट बता जेडीए अवाप्ति को चैलेंज कर रहे हैं।