फलों की तर्ज पर अब सब्जियों में भी ग्राफ्टिंग होगी। इससे सब्जियों में निमेटोड जैसे जीवाणुओं से बचाने में मदद मिलेगी, वहीं इनको परंपरागत रोगों से भी बचाया जा सकेगा। कई परियोजनाएं कई जगह चल रही हैं, राजस्थान में यह प्रोजेक्ट राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (रारी), दुर्गापुरा को मिलेगा। भास्कर से विशेष बातचीत में यह जानकारी राष्ट्रीय सब्जी फसल अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के निदेशक डॉ. बिजेंद्र सिंह ने दी। वे यहां सब्जी फसलों पर 36वीं राष्ट्रीय कार्याशाला एवं ग्रुप बैठक में भाग लेने के लिए आए हुए हंै। कार्यशाला का उद्घाटन शुक्रवार को कृषि वैज्ञानिक भर्ती मंडल, नई दिल्ली के पूर्व चेयरमैन डॉ. कीर्ति सिंह ने किया और अध्यक्षता श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. राठौड़ ने की।
डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि रारी के वैज्ञानिकों को खासतौर से प्रशिक्षण दिलाएंगे और विशेष फंड उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रारी का विशेष नाम है और यहां के वैज्ञानिक इस परियोजना को मुकाम तक पहुंचा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि 1977 में अनुसंधान के लिए केंद्र दुर्गापुरा में खोला गया। तब से ही इस केंद्र ने सब्जियों के क्षेत्र में कई इनोवेशन किए हैं। सब्जी उत्पादन के क्षेत्रफल के मामले में राजस्थान 1.70 लाख हैक्टेयर के साथ देश में 17वंे और 10.8 मैट्रिक टन पैदावार के साथ 16वंे स्थान पर हैं।
इस तरह की जाती है सब्जियों में ग्राफ्टिंग
डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि जंगली पौधे को जड़ सहित जमीन में लगाया जाता है, इसके बाद इसमें कलमनुमा कटिंग करते हैं। इसके बाद जिस सब्जी की फसल लेनी हो, ऊपरी छोर पर उसकी कलम लगाई जाती है। इससे रोग रहित सब्जी का उत्पादन हो सकता है। इस तकनीक के लिए रारी के वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया जाएगा और यहां केंद्र दिया जाएगा।
इसलिए जरूरी : सब्जी हो या खाद्यान्नों की फसल, सबके लिए निमेटोड (सूत्रकृमी) सबसे बड़ा खतरा है। इसके अलावा अन्य परंपरागत रोग और जीवाणुओं का खतरा अलग से हैं। ऐसे में गुणवत्ता और उत्पादन दोनों ही बढ़ाने के लिए ग्राफ्टिंग तकनीक पर शोध किया गया है। पहले यह फूलों और फलों वाले पौधों में किया गया और अब इसे सब्जियों में काम में लिया जा रहा है। ग्राफ्टिंग के बाद निमेटोड का खतरा अत्यधिक कम हो जाता है।