पीएचक्यू ने 2 घोटाले पकड़े, एसओजी-एसीबी दो माह से नहीं कर रही जांच
पुलिस अफसर और कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका वाले मामलों की जांच से एसओजी व एसीबी के अधिकारी बच रहे हैं। आरएसी बटालियन में हुई स्वीपर व कुक भर्ती और हैडक्वार्टर ब्रांच से अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर करके तबादला आदेश जारी करने के मामले में पुलिस मुख्यालय और आरएसी बटालियन ने प्रारंभिक जांच के बाद अपनी रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी है। इस मामले में डीजीपी ने एसओजी व एसीबी को जांच करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी तक कार्रवाई तो दूर एसओजी और एसीबी ने जांच तक शुरू नहीं की है। ऐसे में अब एसओजी व एसीबी के अफसरों पर सवाल खड़े होने लगे है।
केस-1 आरएसी भर्ती में Rs.5-5 लाख लेकर अभ्यर्थियों का चयन
नवंबर 2017 में आर्म्ड बटालियन (आरएसी) धौलपुर छठी बटालियन में 11 स्वीपर व 3 कुक के पदों पर भर्ती की गई थी। एक शिकायत मिलने पर एडीजी के नरसिम्हा राव ने मामले की जांच कराई तो सामने आया कि अफसरों ने 5-5 लाख रुपए लेकर स्वीपर व कुक के पदों पर अभ्यर्थियों का चयन किया था। चयनित अभ्यर्थी आरएसी में कार्यरत कर्मचारियों के बेटे या फिर रिश्तेदार थे। जिन्होंने फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र दिए थे। एडीजी ने मामले की जांच एसीबी व एसओजी से कराने की अनुशंसा की थी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने एसीबी व एसओजी के पास अनुसंधान के लिए भेजा था, लेकिन अभी तक जांच शुरू नहीं की है।
केस-2 डीजीपी के हस्ताक्षर कर तबादला आदेश किए
फरवरी 2018 में हैडक्वार्टर ब्रांच के अधिकारियों की पड़ताल में मुख्यालय के ही कर्मचारियों द्वारा डीजीपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी और गृह विभाग के अधिकारियों के हस्ताक्षर करके तबादला आदेश जारी करने का मामला सामने आया था। अफसरों के नाम से कर्मचारी व पुलिसकर्मियों के पांच तबादला आदेश जारी हुए थे। प्रारंभिक जांच के बाद हैडक्वार्टर ब्रांच के अधिकारियों ने डीजीपी को रिपोर्ट दी थी। इसके बाद डीजीपी ने मामले की जांच करने के लिए एसअोजी को निर्देश दिए थे। लेकिन अभी तक फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
ब्लैकमेलिंग प्रकरण भी : 2016 में एसओजी ने ब्लैकमेल गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह में जयपुर कमिश्नरेट में रहे कुछ इंस्पेक्टर भी शामिल थे। एसओजी ने उन इंस्पेक्टरों काे नामजद भी किया था। एसओजी 20 से ज्यादा जनों को गिरफ्तार कर चुकी है।