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हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए दो साल में इमारत तक नहीं बना पाए हम

3 वर्ष पहले
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सरकारी तंत्र का ढीला रवैया एसएमएस अस्पताल को हार्ट ट्रांसप्लांट से दूर किए हुए है। राजस्थान सरकार की ओर से वर्ष 2017 में 20 करोड़ रुपए स्वीकृत करने के बाद भी एसएमएस अस्पताल में ना तो ट्रांसप्लांट के लिए बनाए जा रहे भवन का काम पूरा हो सका है और ना ही उपकरणों की खरीद हो सकी। एसएमएस अस्पताल के कार्डियो सर्जन की ओर से चिकित्सा विभाग को बार-बार इस संबंध में कई पत्र लिखे गए लेकिन इनका भी कभी माकूल जवाब नहीं आया। सरकार की ओर से ढिलाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने पिछले माह भी हार्ट ट्रांसप्लांट के उपकरणों की खरीद के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपए मांगे लेकिन सरकारी स्तर पर अभी तक कोई क्रियान्विति नहीं हुई। एसएमएस में हार्ट ट्रांसप्लांट क्यों और कैसे अटका तथा दो साल में क्या कागजी कार्रवाई हुई, इस पर भास्कर की विशेष रिपोर्ट।

अंगदान की अलख जगा दी, महादानी भी मिले...फिर! सिर्फ Rs.3 करोड़ के लिए एसएमएस अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट की यूनिट क्यों नहीं लगा रही सरकार?

वर्ष 2016 में नींव डाली, 2017 में दिया बजट...अब तक आधा-अधूरा

एसएमएस अस्पताल में वर्ष 2016 में किडनी, लिवर आर्गन ट्रांसप्लांट का काम तेजी से चल रहा था। लेकिन हार्ट ट्रांसप्लांट की व्यवस्था नहीं होने से हार्ट बाहर भेजे गए।

सरकार ने कहा- पहले कंस्ट्रक्शन कराओ, अस्पताल ने कहा -मशीनें तो दो

बजट स्वीकृत होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि पहले कंस्ट्रक्शन कराना पड़ेगा और उसके बाद ही उपकरणों की खरीद हो सकेगी। लेकिन कंस्ट्रक्शन की गति इतनी धीमी थी कि अस्पताल के डॉक्टर्स ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल को पत्र लिखा और उसमें तीन करोड़ पांच लाख रुपए मशीनों के लिए मांगे। इनमें ईसीएमओ, ओएचएस इंस्ट्रूमेंट, ओटी लाइट, ड्यूल चेम्बर पेस मेकर, टी विद डोपलर एंड थ्री डी व एनेस्थीसिया मशीनें शामिल थी। डॉक्टर्स का कहना था कि हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए भवन से ज्यादा उपकरणों की जरूरत है। यदि उन्हें उपकरण मिल जाते हैं तो वे भी ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।

20 करोड़ रुपए दे दिए लेकिन मशीनों के लिए 3 करोड़ रुपए नहीं

तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि जल्दी ही एसएमएस में भी इसकी व्यवस्था शुरू की जाएगी। वर्ष 2017 के बजट सत्र में एसएमएस में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए 20 करोड़ रुपए के बजट की घोषणा की गई। कुछ ही दिनों में यह पैसा स्वीकृत भी हो गया। उस समय कार्डियो थोरेसिक विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा ने इसे शुरू करने के लिए काफी मशक्कत की और जगह का निर्धारण भी कर लिया।

अधिकारी-मंत्री बदल चुके

वर्ष 2017 में ही चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की जगह कालीचरण सराफ चिकित्सा मंत्री बन गए और कुछ ही दिन बाद हेल्थ सेक्रेटरी रोली सिंह का भी तबादला हो गया। वहीं एसएमएस अस्पताल में रोटेशन के तहत विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा की जगह डॉ. आरएम माथुर विभागाध्यक्ष बन गए। मंत्री अौर अफसर बदलने के साथ ही हार्ट ट्रांसप्लांट की कार्रवाई भी धीमी पड़ती गई।

कंस्ट्रक्शन बंद क्यों, मुझे भी नहीं पता : यूएस अग्रवाल

हर काम का एक प्रोसेस होता है। कंस्ट्रक्शन अभी क्यों बंद है, इसकी जानकारी नहीं है। कंस्ट्रक्शन पूरा होने पर ही उपकरण खरीदेंगे। उपकरण खरीदने संबंधी पत्र आया है, प्रोसेस भी शुरू कर दिया है लेकिन हर काम में समय लगता है। हां, हमने हार्ट पेशेंट का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। -डॉ. यूएस अग्रवाल, प्रिंसीपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज।

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