महानगर की स्थाई लोक अदालत ने एक मामले में फ्लैट की राशि जमा होने के बाद भी आवंटी को एग्रीमेंट में तय सुविधाओं के अनुसार फ्लैट का कब्जा नहीं देने पर श्री शाकम्बरी डवलपर्स पर एक लाख रुपए हर्जाना लगाया है। साथ ही सभी सुविधाओं सहित फ्लैट का कब्जा परिवादी को 2 माह में देने का निर्देश देते हुए परिवाद खर्च 11 हजार रु. अलग से देने को कहा है। लोक अदालत ने डवलपर को कहा है कि वह फ्लैट की जमा कराई गई राशि पर भी 18 प्रतिशत ब्याज परिवादी को दे। लोक अदालत ने यह आदेश कमलेश बाला व डॉ. मुकेश कुमार के परिवाद पर दिया। अधिवक्ता उमेश श्रृंगी ने बताया कि परिवादियों ने डवलपर की श्री शाकम्बरीज कोहिनूर रेजीडेंसी योजना मानसरोवर में फ्लैट संख्या 301 को 2014 में 35,34,813 रु. में बुक कराया। डवलपर ने फ्लैट के साथ आवासीय योजना में स्वीमिंगपूल, हैल्थ क्लब, जॉगिंग ट्रैक ,क्लब हाउस व कम्यूनिटी सेंटर व दो पार्किग सहित अन्य सुविधाएं देना तय किया। फ्लैट का कब्जा सभी सुविधाओं सहित दिसंबर 2015 तक देना था। परिवादियों ने फ्लैट की पूरी राशि का भुगतान कर दिया। फिर भी डवलपर ने परिवादियों को जून 2016 तक सभी सुविधाओं सहित फ्लैट का कब्जा नहीं दिया। इसे स्थाई लोक अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि फ्लैट का समय पर कब्जा नहीं देने के कारण उसे किराए के मकान में रहना पड़ा। इसलिए उसे फ्लैट का कब्जा सभी सुविधाओं सहित दिलवाया जाए।
एग्रीमेंट में तय सुविधाओं को पूरा कर दो माह में फ्लैट का कब्जा देना होगा
नोटिस मिला पर जवाब नहीं दिया, सरकार पर Rs.30 हजार का हर्जाना
जयपुर | हाईकोर्ट ने नोटिस तामील होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए सरकार पर तीस हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। वहीं जवाब के लिए सरकार को 25 मई तक का समय दिया है। न्यायाधीश वीएस सिराधना ने यह आदेश कयामुद्दीन मंसूरी की याचिका पर दिया। मामले के अनुसार, प्रार्थी ने चिकित्सा विभाग के एनआरएचएम में संविदा भर्ती में चयन नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पूर्व में नोटिस जारी किए थे। लेकिन सरकार ने मामले में नोटिस की तामील नहीं होने के बाद भी जवाब नहीं दिया। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पुन: जवाब के लिए समय मांगा। जिस पर अदालत ने राज्य सरकार पर 25 हजार रुपए हर्जाना लगाते हुए उसे जवाब के लिए समय दिया।