निगम के पशु पकड़ने वाले ठेकेदारों और शहर में अवैध डेयरी संचालित करने वाले लोगों के बीच सांठ-गांठ के चलते शहर को लावारिस पशुओं से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। नगर निगम का पशु पकड़ने वाला दस्ता गाय पकड़ने में भी भेदभाव कर रहा है। डेयरी संचालकों ने अपनी गायों की पहचान के लिए अगल-अलग तरीके निकाल रखे हैं। कुछ गायों के पैरों में कड़े पहनाए गए हैं तो कुछ के गले में एक विशेष तरह की घंटी और लॉकेट पहनाए गए हैं। निगम के पशु पकड़ने वाले ठेकेदारों को इन पहचान चिन्हों के बारे में पता है। ऐसे में कार्रवाई के दौरान गले में घंटी, लॉकेट और पैरों में कड़े पहनी गायों को हाथ तक नहीं लगाया जाता।
शनिवार को भी निगम ठेकेदारों की कुछ ऐसी ही हरकत हुई। टोंक रोड हिम्मत नगर में लावारिस पशु पकड़ने निकले ठेकेदारों ने कड़े पहनी गायों को छोड़ दिया और दूसरी गायों को वाहनों में भरकर ले गए। उल्लेखनीय है कि इन्कम टैक्स कॉलोनी में चार दिन पहले गाय के हमले से एक महिला गंभीर रुप से घायल हो गई थी। ऐसे में इसी क्षेत्र में कार्रवाई के लिए निगम ठेकेदारों ने शनिवार को हिम्मत नगर को चुना। करीब दो घंटे चली कार्रवाई में कड़े, लॉकेट और घंटी वाली गायों को वहीं छोड़ दिया गया।
इन्कमटैक्स कॉलोनी में अब भी घूम रही हैं लावारिस गायें
इन्कमटैक्स कॉलोनी में बुधवार को रजनी भावनानी को गाय के टक्कर मारने की घटना के चार दिन बाद भी इलाके में लावारिश गायें घूम रही है। कॉलोनी में संचालित डेयरियों पर निगम ने कार्रवाई नहीं की। इसके चलते कॉलोनी के रास्तों में गायों के बैठने से लोगों का आना-जाना मुश्किल हो रहा है। घटना के बाद कॉलोनीवासी दहशत में है। उन्होंने खाने की वस्तुओं को घर से बाहर नहीं डालने के जगह-जगह बोर्ड लगाए है। इससे पहले भी 19 नवंबर 2017 को चौड़ा रास्ता में सांड के हमले से एक विदेशी नागरिक की मौत हो चुकी है।
शहर में 3000 डेयरियां संचालित कार्रवाई मात्र 150 पर की गई
शहर में करीब 3000 अवैध डेयरियां संचलित हा़े रही है यह आंकड़ा नगर निगम द्वारा अक्टूबर 2017 में जुटाया गया था। इसके बाद नगर निगम ने जेडीए को पत्र लिखकर डेयरी संचालकों को अलॉट किए भूखंडों को निरस्त करने को कहा था। इसी दौरान चौड़ा रास्ता में नवंबर 2017 में अर्जेंटीना के नागरिक की सांड की टक्कर से मौत हो गई थी। निगम ने अवैध डेयरियों के खिलाफ व लावारिश पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान चलाया। एक माह तक अवैध डेयरियों के खिलाफ अभियान चलाया लेकिन एक माह में ही बंद कर दिया गया। मात्र डेढ़ सौ डेयरियों पर कार्रवाई की गई। वहीं निगम दावा कर रहा है कि पांच माह में शहर से अब तक 14 हजार लावारिस पशुओं को पकड़ा जा चुका है।
राजस्थान यूनिवर्सिटी परिसर
हिम्मतनगर गोपालपुरा पुलिया के पास पक्षियों का दाना खाते पशु।
जांच कर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी
अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम डॉ. हरसहाय मीना का कहना है कि लावारिस पशु पकड़ने वाली कंपनी के कर्मचारी सांठगांठ कर अवैध डेयरी संचालकों के पशुओं को नहीं पकड़ रहे है तो गलत है, इसकी जांच कर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।
पैरों में कड़े पहनी गायों को हाथ नहीं लगाया जाता।